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पंजाब परिषद की बैठक में भाजपा का एलान: सिख विरोधी दंगों व बेअदबी मामलों को बनाएंगे चुनावी मुद्दा, कांग्रेस को घेरने की तैयारी

Tue, 14 Dec 2021 07:36 PM IST
ajay kumar वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)

सार

कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। इसी के साथ पंजाब में भाजपा भी मैदान में उतर चुकी है। मंगलवार को लुधियाना में प्रदेश परिषद की बैठक हुई। भाजपा ने बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के कौन-कौन से मुद्दे होंगे।
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लुधियाना में हुई भाजपा की पंजाब परिषद की बैठक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपना रुख साफ कर दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में सिख दंगों और पंजाब में हुई बेअदबी को पार्टी चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। मंगलवार को लुधियाना में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्य परिषद की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने अपने संबोधन में यह बात स्पष्ट तौर पर कही है। इससे साफ है कि किसान आंदोलन के बाद अब भाजपा सीधे तौर पर सिख वोट बैंक पर निशाना साधने जा रही है, जो कि शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस अपना बड़ा वोट बैंक मानती है। इसमें करतारपुर कोरिडोर का श्रेय भाजपा लेने से चूकने वाली नहीं है। 

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भाजपा प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा ने कहा कि पंजाब के साथ न्याय नहीं हुआ है। 1984 में हजारों सिखों का कत्लेआम करने वाले आरोपियों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के समय में ही सजा हुई। अब पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं के आरोपियों को भी उनकी सरकार के समय ही सजा मिलेगी। 

नरेंद्र मोदी पंजाब के लोगों से प्यार करते हैं, इसलिए उन्होंने किसानों के हित में कानूनों को वापस लिया है। अब पंजाब में भाजपा अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। भाजपा का एक ही मकसद होगा पंजाब को तरक्की की राह पर लेकर जाना। भाजपा के सीनियर नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने 1984 सिख दंगों के आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने का सबसे बड़ा काम किया है लेकिन कांग्रेस सरकार ने सिख दंगों के आरोपियों को बचाने का काम किया है। 
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अभी 27 कांग्रेस नेता ऐसे हैं जो कि सिख दंगो के आरोपी थे। उन्हें आज भी कांग्रेस पार्टी ने उच्च पदों पर बैठा रखा है। अब पंजाब के सीएम चन्नी इस मुद्दे को लेकर अपनी पार्टी के खिलाफ क्यों नहीं बोल रहे हैं। दिल्ली में तीन दिन तक सिख दंगे होते रहे लेकिन एक आरोपी पुलिस की गोली से नहीं मरा। जबकि गुजरात दंगों में पुलिस की गोली से कई दंगाई मारे गए थे।

दिल्ली में ऐसा क्यों नहीं हुआ क्योंकि यहां पर कांग्रेस नेता खुद दंगों में शामिल थे। केंद्र सरकार की तरफ से पंजाब के लोगों की काली सूची तैयार की थी, जिसे आज तक किसी ने खत्म नहीं किया था लेकिन मोदी सरकार ने बिना किसी मांग के काली सूची को खत्म किया है।

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