जालंधर। ट्रैफिक ड्राइव के दौरान एक हफ्ते में ट्रैफिक पुलिस ने 11 हजार 493 चालान काट डाले। यूं तो पुलिस कमिश्नर ने ट्रैफिक ड्राइव लोगों को जागरुक करने के लिए चलाई थी। यह अभियान तब शुरू हुआ जबकि चुनाव चुनावी प्रक्रिया खत्म हो गई थी। शहर में 32 जगहों पर चालान काटने का सिलसिला शुरू हआ। थाने की पुलिस अलग चालान काट रही थी। जिसमें बिना हेलमेट लाइसेंस, आरसी, बीमा, बिना सीट बेल्ट, रेड लाइट जंप और कुछ मामलों के चालान हैं।
आंकड़ों के अनुसार बिना हेलमेट के चालान में स्कूली बच्चों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हालांकि ट्रैफिक ड्राइव पर लोगों का जमकर गुस्सा फूटा और बोले कि पुलिस ने बहुत परेशान किया है, कागज होने के बावजूद चालान काटने की बात कहते थे। समाज सेवक डॉ रामगोपाल ने कहा कि पुलिस को पहले अपना सिस्टम सुधारना चाहिए, जाम की समस्या तो कम नहीं हो रही, चालान काटने के चक्कर में जगह-जगह जाम की स्थिति पैदा कर देते हैं। चौक में ट्रैफिक लाइट नहीं चलती हैं पर ट्रैफिक पुलिस का कोई नुमाइंदा वहां ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं होता। बस थोड़ी दूर आगे खड़े होते हैं और बिना वजह पकड़ लेते हैं।
चालान नहीं देखें पॉजिटिवटी : स्कूली बच्चों ने हेलमेट पहनना सीख लिया, नियम तोड़ने वाले परेशानी की बात कर रहे
एडीसीपी ट्रैफिक गगनेश कुमार ने कहा कि स्कूलों से रिपोर्ट में पता चला है कि ट्रैफिक ड्राइव से स्कूली बच्चों में जागरूकता आई और वह हेलमेट पहनने लगे। ट्रैफिक पुलिस के चालान के नहीं उनकी पॉजिटिवटी देखिए, परेशानी की बात करने वाले बताएं कि नियमों का पालना क्यों नहीं करते। वह नियमों का पालन करें, कागज पूरे रखें उन्हें कोई नहीं रोकेगा। हमारा मकसद लोगों को परेशान करना नहीं है, ट्रैफिक पुलिस पर टारगेट बेस काटे जा रहे चालान के आरोप बेबुनियाद हैं। हम शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने व लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ट्रैफिक ड्राइव चला रहे हैं क्योंकि सड़क हादसों में मौत का आंकड़ा बढ़ा है।