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सरकार के उदासीन रवैय से बंद होने की कगार पर पहुंची पंजाब की 70 प्रतिशत इंडस्ट्री

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जालंधर। पंजाब की इंडस्ट्री इस समय बहुत बुरे हालात से गुजर रही है। पिछले एक साल से पंजाब में इंडस्ट्री का बिजनेस करीब 60 से 70 फीसदी कम हो चुका है। उद्योगपतियों का कहना है कि पंजाब में 60 से 70 प्रतिशत इंडस्ट्री या तो बंद हो चुकी है या बंद होने की कगार पर है। इस बारे में हमने शहर के कुछ उद्यमियों से बात की तो उन्होंने कहा कि पंजाब व केंद्र सरकार दोनों ही इंडस्ट्री की सुध नहीं ले रहे हैं। जिसके कारण इंडस्ट्री बहुत बड़ी परेशानी से गुजर रही हैं।
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200 प्रतिशत केमिकल और तीस प्रतिशत बढे स्क्रैप के रेट - सूबा सिंह
इंडस्ट्रियल इस्टेट, फोकल प्वाइंट, जालंधर के प्रधान उद्योगपति सूबा सिंह का कहना है कि पंजाब में इंपोर्ट होने वाले केमिकल के रेट में 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही 30 से 35 फीसदी रेट स्क्रैप के बढे हैं। पहले जो स्कैप 30 रुपये किलो मिलता था, इस समय 47 रुपये किलो हो गया है। इसके साथ ही सिलीकॉन, जिसको चप्पल बनाने वाली व अन्य काफी इंडस्ट्री इस्तेमाल करती हैं, का रेट पहले 70 रुपये किलो था, जो कि अब 200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कार्बन 25 रुपये किलो था, वह भी 70 से 80 रुपये किलो में मिल रहा है। इंडस्ट्री को सबसे बड़ी मार यह है कि सरकार जो मॉल इंडस्ट्री से लेती है, उसके रेट में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। सरकारी टेंडर पुराने रेट पर ही मांगे जा रहे है। उनका कहना है कि सरकार को पता है कि इंडस्ट्री की लागत 20 से 25 प्रतिशत तक बढी हैं। बढे़ दाम में इंडस्ट्री मॉल बनाकर सरकार को पुराने रेट में कैसे बेच सकती है। यह वजह है कि पंजाब की इंडस्ट्री पर बैंक व अन्य खर्चों का बोझ बड़ रहा है। इंडस्ट्री एनपीए होकर बंद हो रही है।
50 प्रतिशत रह गया 90 प्रतिशत इंडस्ट्री का काम - नरेंद्र सग्गू
पंजाब में इंडस्ट्री के इन हालत पर फोकल प्वाइंट एसोसिएशन, जालंधर के प्रधान नरेंद्र सग्गू का कहना है कि इंडस्ट्री को केंद्र सरकार सपोर्ट नही कर रही है। इस समय 90 प्रतिशत इंडस्ट्री की सेल 50 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा कोविड के कारण पैसा मार्केट से गायब हो गया है। कोविड की मार से लोगों ने अब पैसा जमा करना शुरू कर दिया है। यह भी एक कारण है कि मांग कम होने से इंडस्ट्री के पास आर्डर नहीं आ रहे हैं। लोगों ने लग्जरी चीज खरीदना, घर की कंस्ट्रक्शन में लग्जरी चीजों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। इससे इंडस्ट्री को मार पड़ी है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकारें इंडस्ट्री की तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं, जो कि इंडस्ट्री के खत्म होने का एक बहुत बड़ा कारण है।
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