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SGPC: हरजिंदर धामी को एसजीपीसी की सत्ता मिली पर कांटों से भरा होगा ताज, बढ़ रहा विरोधी धड़ा

Thu, 10 Nov 2022 02:53 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

एसजीपीसी के सदस्य परमजीत सिंह रायपुर का कहना है कि बीबी जागीर कौर के खिलाफ शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने पूरी ताकत झोंक रखी थी, फिर भी 42 सदस्यों  ने धामी के खिलाफ वोट दिया। ये बादल के लिए मुश्किल पैदा करने वाले होंगे।
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हरजिंदर सिंह धामी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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102 साल पुरानी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पर एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी चुनाव जीतकर काबिज तो हो गए हैं, लेकिन आगे की डगर चुनौतीपूर्ण होगी। पूर्व प्रधान गुरचरण सिंह टोहड़ा के बाद एसजीपीसी के अंदर एक बड़ा मजबूत विरोधी धड़ा खड़ा हो गया है, जो हर कदम पर एडवोकेट धामी की घेराबंदी करेगा। अभी तक एसजीपीसी में सवाल उठाने वाले एक- दो सदस्य ही होते थे, लेकिन अब 42 सदस्य एकजुट हो गए हैं यानी मजबूत विपक्ष बन गया है। 

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एसजीपीसी के सदस्य परमजीत सिंह रायपुर का कहना है कि बीबी जागीर कौर के खिलाफ शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने पूरी ताकत झोंक रखी थी, फिर भी 42 सदस्यों  ने धामी के खिलाफ वोट दिया। ये बादल के लिए मुश्किल पैदा करने वाले होंगे। दरअसल, कई विवाद एसजीपीसी का पीछा कर रहे हैं, जिसमें नानकशाही कैलेंडर का विवाद सबसे पुराना है। 

ये है विवाद

  • जत्थेदारों के अधिकार और उनकी नियुक्ति करना 
  • स्वर्ण मंदिर परिसर से 328 गुरु ग्रंथ साहिब की पुस्तकें (स्वरूप) गायब होना
  • कनाडा में श्री गुरु ग्रंथ साहब के पावन स्वरूप छापने के लिए पेन ड्राइव में सॉफ्ट कॉपी किसने भेजी थी, इसको लेकर कटघरे में है। 
  • पंजाब में धर्म परिवर्तन पर सवाल उठ रहे हैं कि उनका सिख मिशनरी की तरफ ध्यान नहीं है
  • भारी संख्या में सिख ईसाई धर्म का हिस्सा बन गए और पास्टर की चर्च में जाना शुरू हो गए हैं। 
  • दरबार साहिब से गुरुबाणी के सीधे प्रसारण के अधिकार केवल बादल परिवार के चैनल के पास होना


आम चुनाव में सामना करना होगा मुश्किल  
एसजीपीसी का आम चुनाव 18 सितंबर 2011 को हुआ था। अब गुरुद्वारा चुनाव के लिए सेवानिवृत्त जस्टिस एसएस सरों बतौर मुख्य कमिश्नर तेजी से काम कर रहे हैं और कभी भी एसजीपीसी के आम चुनाव हो सकते हैं। वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में सहजधारियों को एसजीपीसी चुनाव में वोट न देने के आदेश जारी किए थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के चुनाव के बाद गठित साधारण सभा को भी बहाल कर दिया था। गौर करने वाली बात है कि लगभग आठ लाख सहजधारी सिख इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। एसजीपीसी के चुनाव करवाने का प्रावधान हर पांच वर्ष के बाद है। अगले वर्ष जुलाई में चुनाव होने की संभावना है। पांचों तख्तों के जत्थेदार भी साधारण सभा के सदस्य होते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता है। पिछले एसजीपीसी चुनाव में मतदाताओं की संख्या लगभग 56 लाख थी। बीबी जागीर कौर के सहयोगी एसजीपीसी सदस्य परमजीत सिंह रायपुर का कहना है कि आगामी आम चुनाव टक्कर के होने जा रहे हैं। बीबी जागीर ने चुनावों के लिए मैदान तैयार

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