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दस दिन बाद भी एसआईटी के हाथ खाली, पता नहीं चला कौन लखबीर को गांव से कुंडली बार्डर ले गया था

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तरनतारन। 15 अक्तूबर को कुंडली बार्डर पर बेरहमी से कत्ल किए गए गांव चीमा खुर्द निवासी 34 वर्षीय युवक लखबीर सिंह के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के हाथ खाली हैं। दस दिन की जांच के दौरान एसआईटी को कोई ऐसा सुबूत नहीं मिल पाया, जिसमें साबित हो सके कि लखबीर सिंह को गांव चीमा खुर्द से निहंग सरबजीत सिंह लेकर गया था। न कोई ऐसा सुराग हाथ लगा जिसके माध्यम से पता चल सके कि लखबीर को गांव से आखिर कौन कुंडली बार्डर पर ले गया था।
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दस दिन की जांच में सामने आया है कि निहंग सरबजीत गांव चीमा में कभी नहीं आया और न ही इस मामले के तार गउओं वाले बाबा दिलबाग सिंह के साथ जुड़े हो सकते है। लखबीर सिंह की हत्या के बाद पंजाब सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एडीजीपी वरिंदर कुमार की अगुआई में फिरोजपुर के डीआइजी इंद्रबीर सिंह, तरनतारन के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क के आधारित एसआइटी ने 10 दिन की जांच में करीब 18 लोगों से पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी कब्जे में ली गई। इस फुटेज में ऐसा कोई भी सुबूत हाथ नहीं लगा, जिसमें निहंग सरबजीत सिंह या लखबीर सिंह के गोशाला में रहने की फुटेज हो। फिलहाल, एसआईटी का निहंग सरबजीत सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ करने का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के अनुसार लखबीर सिंह अकेला कुंडली बार्डर नहीं गया, बल्कि उसे कोई अपने साथ ले गया था और यह शख्स कौन है, इसका पता लगाना एसआईटी की बड़ी सिरदर्दी है। एडीजीपी वरिंदर कुमार कहते है कि लखबीर सिंह के मामले में चल रही जांच के बीच कुछ बताना अभी वाजिब नहीं होगा।
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