वाराणसी के डाफी बाईपास पर बुधवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल लोगों का इलाज बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में जारी है। घायलों में से एक 48 वर्षीय महिला की हालत गंभीर है। गुरुवार सुबह मृतक चारों महिलाओं के शव लेकर परिजन बिहार के दाउदनगर (औरंगाबाद) के लिए रवाना हो गए। दुर्घटना ग्रस्त पिकअप का चालक अभी भी लापता है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
अस्पताल में मौजूद परिजनों के चेहरे पर हादसे का दर्द साफ नजर आया। डाफी बाईपास स्थित गोकुल ढाबा के समीप बुधवार सुबह स्टेयरिंग फेल होने से मालवाहक वाहन पलटा (पिकअप) पलट गया। हादसे में चार महिलाओं की मौत हो गई और 19 लोग घायल हो गए। सभी मजदूर बरेली के शाहजहांपुर से बिहार के औरंगाबाद स्थित दाउनगर अपने घर जा रहे थे।
दिवाली और छठ पूजा को देखते हुए सभी घर लौट रहे थे। एक ही पिकअप में 33 लोग सवार थे। इसमें महिलाएं, पुरुष और सात बच्चे भी थे। वाहन में नीचे मजदूर और ऊपर पटरी लगाकर सामान रखा गया था। डाफी टोल प्लाजा से पहले गोकुल ढाबा के पास वाहन की स्टेयरिंग फेल हो गई। अनियंत्रित वाहन किनारे डिवाइडर से टकराते हुए पलट गया।
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वाराणसी सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ट्रॉमा सेंटर के रेड एरिया में बेड पर भर्ती सगे भाई-बहन छोटी (3) और रवि (3) के पैर में चोट लगी है। दर्दनाक हादसे में उनकी मां की मौत हो गई। दोनों लगातार रो रहे हैं और अपनी मां को बुला रहे हैं। अस्पताल में मौजूद हर कोई उन्हें संभाल रहे हैं। रवि के पिता कैलाश भी भर्ती है। अपनी पत्नी को मुखाग्नि नहीं दे सके। मृतक पत्नी का अंतिम चेहरा भी नहीं देख पाए।
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- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों और पुलिसकर्मियों के बीच इस बात की चर्चा रही कि इतना भीषण हादसा हुआ लेकिन संयोग और ईश्वर की कृपा रही कि पिकअप में सवार सात बच्चों को कुछ नहीं हुआ। सात बच्चे सही सलामत रहे। कुछ को हल्की चोेटें आई। सुरक्षाकर्मियों ने यही कहा कि जाको राखे साईयां, मार सके न कोए..
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बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों और पुलिसकर्मियों के बीच इस बात की चर्चा रही कि इतना भीषण हादसा हुआ लेकिन संयोग और ईश्वर की कृपा रही कि पिकअप में सवार सात बच्चों को कुछ नहीं हुआ। सात बच्चे सही सलामत रहे। कुछ को हल्की चोेटें आई। सुरक्षाकर्मियों ने यही कहा कि जाको राखे साईयां, मार सके न कोए..
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यातायात माह के दौरान सुरक्षा और संरक्षा, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर 33 लोग सवार थे। इस लापरवाही ने हादसे को बड़ा बना दिया। पिकअप के अंदर महिलाएं और बच्चे बैठाए गए और ऊपर पटरा रखकर सामान रखा गया था। यातायात नियमों की इस अनदेखी ने चार जिंदगियों छीन ली। जीवन भर का दर्द परिजनों को दिया।
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बुधवार को घटनास्थल पर जो भी पहुंचा और क्षतिग्रस्त वाहन को देखा तो यही मुंह से निकला कि ऐसी अनदेखी जिंदगी पर भारी पड़ गई। वहीं हादसे के बाद से ड्राइवर का कोई पता नहीं चल सका है।
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हाइवे पर हादसे की भयावहता मौके पर बिखरे सामान और घायलों के चप्पल और जूते बता रहे थे। वाहन जब पलटा तो पीछे महिलाएं सो रही थीं तो कुछ जग रहीं थी। दो साल की मासूम बेटी काजल को बचाती हुई उसकी मां किरण जख्मी हो गई। किरण ने बताया कि ऐसा लगा कि जैसे कुछ ऊपर से गिर गया हो। कुछ देर के लिए आंखों के सामने सन्नाटा पसर गया। मौके पर अचेत थी और अस्पताल में होश आया।
महीनों बाद घर लौटने की खुशी और परिवार के साथ दिवाली मनाने की ख्वाहिश कौशिल्या की अधूरी रह गई। हादसे में कौशिल्या की मौत पर बेसुध पति विनोद की तो मानो जैसे दुनिया ही उजड़ गई। दाउदनगर के रहने वाले विनोद ने बताया कि घर जाने की तैयारी सप्ताह भर पहले से ही कौशिल्या ने कर ली थी। ससुराल और मायके के लोगों के लिए कई सामान भी खरीदे थे। सब खुशियां मातम में बदल गई। यह दिवाली ताउम्र नहीं भूलेगी।