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पंचक्रोशी यात्रा: तीसरा पड़ाव भीमचंडी से रामेश्वरम का हाल, धर्मशाला बनी पुलिस चौकी, शराब की बोतलें, सड़कें भी टूटीं

Sat, 19 Sep 2020 10:04 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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धर्मशाला बनी पुलिस चौकी। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में पंचक्रोशी यात्रा शुक्रवार को शुरू हो गई, लेकिन यात्रा के पड़ावों की स्थिति मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद काफी खराब है। जब यात्रा के पड़ावों और सड़कों की पड़ताल की गई तो पता चला कि रामेश्वर में मंदिर के ठीक सामने स्थित धर्मशाला पुलिस चौकी में तब्दील हो चुकी है। यहां 28 सालों से पुलिस का ठिकाना है।
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शराब की बोतलें। - फोटो : अमर उजाला
धर्मशाला परिसर में जगह-जगह शराब और बीयर की बोतलें बिखरी मिलीं। यहां मौजूद पुलिस वालों ने कहा कि अगर पुलिस चौकी नहीं खोलते तो धर्मशाला और भी टूट चुकी होती और इस पर अवैध कब्जा हो जाता।
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वहीं, एसपी ग्रामीण मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि चौकी के भवन के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। भवन का निर्माण कार्य पूरा होते ही चौकी को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।

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भीमचंडी से रामेश्वरम तक 23 किलोमीटर की पड़ताल के दौरान कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। सड़क और पटरियों का निर्माण चल रहा है। कुछ जगह मजदूर सड़क और पटरी के काम में लगे हुए थे। कई जगह पटरियों का काम अधूरा है तो कहीं गिट्टियां बिखरी हैं। जंसा स्थित भैरवनाथ मंदिर पर यात्रियों के ठहरने के इंतजाम नहीं है। मंदिर स्थित भैरव तालाब भी उपेक्षा का शिकार है।
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रामेश्वर में मंदिर के सामने वाली सड़क अधूरी पड़ी हुई है। सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया है। यात्रियों के रात्रि विश्राम के लिए आठ धर्मशालाएं हैं। इन पर अवैध कब्जा है। दो धर्मशालाएं जर्जर हो चुकी हैं। मंदिर परिसर में पेयजल व्यवस्था और शुलभ शौचालय की स्थिति भी बदतर है।
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राममूर्ति दास उर्फ मद्रासी बाबा, महंत, रामेश्वर मंदिर
पंचक्रोशी परिक्रमा पथ पर सीएम की यात्रा के बाद सड़क और पटरियों को दुरुस्त किया जा रहा है। बावजूद इसके इस मार्ग पर और मंदिर के आसपास प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन से प्रकाश और साफ-सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए। -राममूर्ति दास उर्फ मद्रासी बाबा, महंत, रामेश्वर मंदिर
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वरुणा घाट पर पसरी गंदगी
धार्मिक महत्व व पर्यटन के लिहाज से मशहूर रामेश्वर मंदिर वरुणा के तट पर स्थित है। हालत यह है कि एक तट पर ग्रामीणों के मवेशी वरुणा में ही नहा रहे हैं तो दूसरे तट पर घाट के किनारे गंदगी पसरी हुई है।
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रामेश्वर महादेव मंदिर का महत्व
तीर्थ धाम में शैव संप्रदाय के साथ वैष्णव संप्रदाय का अद्भुत मिलन केंद्र है। मान्यता है कि रावण वध के बाद पाप से मुक्ति की कामना से भगवान श्रीरामचंद्र सपरिवार यहां आए थे। उन्होंने एक रात्रि विश्राम के दौरान संध्या तर्पण में एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी शिवलिंग पर रामेश्वर महादेव का मंदिर व वरुणा नदी तट पर घाट का निर्माण जनकोजी राव सिंधिया ने कराया था। इसे जीवाजी राव सिंधिया ने पूर्ण कराया था। 
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