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Chhath 2020: छठ महापर्व पर घरों में गूंजने लगे गीत, प्रशासन की अपील- घर पर करें पूजा

Fri, 20 Nov 2020 09:28 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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छठ पर पूजा करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
भगवान भास्कर की आराधना और लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ आरंभ हो गया। घरों में छठी मैया के गीत गूंजने लगे हैं तो घाट व कुंडों पर सफाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण काफी एहतियात बरती जा रही है।

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छठ पर वाराणसी में सजे घाट। - फोटो : अमर उजाला
वहीं कोरोना की वजह से इस बार ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। जिला प्रशासन लगातार कोरोना गाइडलाइन के साथ छठ महापर्व मनाने की अपील कर रहा है। प्रशासन कहा कहना है कि संभव हो तो लोग घरों में ही पूजा करें। कौशल राज शर्मा ने बताया कि किसी पर कोई पाबंदी नहीं है। बस कोविड-19 को लेकर सतर्क और जागरूक किया जा रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा को ध्यान में रखकर नगर आयुक्त गौरांग राठी ने गंगा घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान कमियों को दुरुस्त कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। जहां घाट की सीढि़यां टूटी थीं। उनकी मरम्मत कराने का निर्देश दिया। घाटों से गंदगी हटाने के साथ वहां पर दवाओं का छिड़काव कराने को कहा। जिसके बाद काम शुरू हो गया।

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छठ पूजा - फोटो : ANI
बुधवार को छठ पूजन वाले घरों की रौनक बदली-बदली नजर आई। कहीं सफाई हो रही थी तो कहीं पूजा की तैयारियां। गीत गवनई संग घर व खास तौर पर पूजा गृह को स्वच्छ किया गया। वहीं घाट पर घाट छेंकने और वेदी बनाने का काम भी चलता रहा। नहाय खाय की रस्म के लिए सबसे पहले महिलाओं ने गंगा स्नान किया।
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chhath - फोटो : अमर उजाला
अधिकांश व्रती महिलाओं ने घरों में स्नान को प्राथमिकता दी। इसके बाद भगवान भाष्कर की पूजा करके कद्दू, नया चावल और चने की दाल का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके भगवान भाष्कर की आराधना के निमित्त आत्म शुद्धता का संकल्प लिया गया। गंगा घाट और कुंडों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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छठ पूजा - फोटो : अमर उजाला
हालांकि गंगा के किनारे कई घाटों पर अभी तक सफाई का काम अधूरा है। वरुणा के तट पर भी वेदी बनाने का काम चलता रहा। वहीं बरेका के सूर्य सरोवर पर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहां पर बिना कोरोना रिपोर्ट के किसी को भी पूजा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
 
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आज खरना की रस्म
छठ के दूसरे दिन यानी आज गुरुवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करती हैं। इसे खरना कहा जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिठ्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है।
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