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अधिकांश व्रती महिलाओं ने घरों में स्नान को प्राथमिकता दी। इसके बाद भगवान भाष्कर की पूजा करके कद्दू, नया चावल और चने की दाल का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके भगवान भाष्कर की आराधना के निमित्त आत्म शुद्धता का संकल्प लिया गया। गंगा घाट और कुंडों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।