शारदा नदी में पानी की तेज आवाज और गांव में पसरा सन्नाटा, मंगलवार रात तबाही का मंजर बयां करने के लिए काफी था। बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि कई लोगों के सिर से आशियाना छिन गया। भूख से कई बच्चे मां की गोद में छटपटाते रहे। प्रशासन की चूक या फिर दैवीय आपदा, जो भी हो इस तबाही में बड़ी संख्या में लोग अपना आशियाना खो चुके हैं। थोड़ा-थोड़ा जोड़कर रखा गृहस्थी का सामान और खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल बर्बाद हो गई।
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पीलीभीत में बाढ़ का दर्दनाक मंजर
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार भोर में तीन बजे नगरिया खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में आशियाना बनाए लोगों से जानकारी की गई, तो नरेंद्र दास ने बताया कि सब कुछ तबाह हो गया। अचानक आई बाढ़ से घर से भागना मुश्किल हो गया। एसएसबी के जवान भगवान साबित हुए। बाढ़ का खौफ सताने लगा है। विकास सरकार ने बताया कि पहले नहीं बताया गया कि बाढ़ आने की आशंका है। अचानक शारदा नदी उफना गई। घरों में पानी भरने लगा। रात में उठे तो पता चला कि बाढ़ आ गई है। घर के सामान और जानवरों तक का पता नहीं चल रहा है। चिंतित बैठीं भरो विश्वास ने बताया कि कुछ नहीं बचा है। समय से पता चल जाता, तो जरूरी सामान निकाल लाते। बच्चे भूख से परेशान थे, तो ग्राम प्रधान ने खाने पीने की व्यवस्था की है। मदद के लंगर भी चल रहे हैं।
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पीलीभीत में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
रमनगरा निवासी सलविंदर सिंह ने कहा कि शारदा नदी में इतनी तेज बाढ़ आएगी। पता नहीं था, बताया भी नहीं गया। पहले अलर्ट किया गया होता तो सामान लेकर घर पहले ही छोड़ देते। कपड़े, सामान सब छूट गए। भयानक मंजर तीन दिन तक बना रहा। वहीं, लक्खा सिंह ने बताया कि बाढ़ में प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया। लोगों ने खुद ही लंगर की व्यवस्था कर बेघर हुए लोगों को सहारा दिया है। पहले 112 नंबर की गाड़ी आ भी जाती थी, मगर जब से बाढ़ आई कोई नहीं देखने आया।
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जरूरी सामान लेकर जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा ग्रंथी के कृपाल सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी बस्ती में घुस गया। लोगों ने गुरुद्वारा में शरण ली। सभी के लिए लंगर की व्यवस्था कराई गई है। इतना खतरनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा। प्रशासन की ओर से पहले से कोई भी अलर्ट नहीं किया गया।
बाढ़ से सुरक्षित लौटने पर प्रभाती मजबुदार ने बताया कि हम गुनहान में रुके हुए थे। सोमवार को अचानक पानी बढ़ने लगा था। वहां करीब 40 लोग फंसे हुए हैं। रात में छत के ऊपर और कुछ लोग नाव में रहते थे। तीन दिन से खाना पीना कुछ नहीं मिल सका। छोटे छोटे बच्चे भूख से परेशान थे, मगर चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते थे। वहीं, एकादशी विश्वास ने कहा कि हमलोग शारदा पार गुनहान में थे। सोमवार कर राज अचानक शारदा नदी में पानी बढ़ गया। पानी कम होने के बजाय बढ़ता गया। तीन दिन तक छत पर बैठे रहे। चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देने से डर भी लगा रहा था।