मेरठ के बहादरपुर गांव की चकरोड से निकलकर अन्नू रानी अब टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना होंगी। 12 साल के खेल कॅरियर में आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर अन्नू ने लाजवाब प्रदर्शन किया। हाल ही में 63.24 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जहां वह मात्र .77 मीटर से ओलंपिक क्वालिफाई करने से चूक गई थीं। लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर ओलंपिक में शामिल होने का गौरव हासिल हुआ।
किसान अमरपाल सिंह के घर 28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नू रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी है। अमरपाल सिंह ने बताया उनका भतीजा लाल बहादुर व बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं। वह खुद शॉटपुट खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता की प्रेरणा से अन्नू रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा। वह गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थीं। शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक में अभ्यास करती थीं।
25 सौ रुपये में दिलाया पहला भाला
अमरपाल सिंह बताते हैं कि वह डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे, अन्नू को पहला भाला 25 सौ रुपये में दिलाया था। मेरठ की एटीई निदेशक आदर्श आनंद ने भाले स्पांसर किए। जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की। माता मुन्नी देवी ने खुशी जताई। पिता ने कहा उनकी बेटी ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी।