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मुठभेड़: खाकी-खादी के संरक्षण में चलते रहे अकबर के काले कारनामे, असम पुलिस से हर बार बच जाता था बंजारा 

Wed, 20 Apr 2022 02:38 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
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मुठभेड़ में बदमाश घायल। - फोटो : amar ujala
खाकी और खादी की सरपरस्ती में अकबर बंजारे का गोस्तकरी का धंधा दूसरे राज्यों में फलता-फूलता रहा। असम की पुलिस उसको ढूंढती रही और मेरठ पुलिस बचाती रही। करीब दो साल से यह खेल चल रहा था। मामले की जानकारी लगने पर एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने फलावदा पुलिस को लगाया और घेराबंदी कराकर अकबर बंजारा व उसके दो भाई सलमान, शमीम को गिरफ्तार कराया। गिरफ्तारी के दौरान बंजारे ने खाकी-खादी के खेल की यह बात मेरठ पुलिस को बताई। 

अकबर बंजारा बहुत शातिर था। वह गोकशी लगातार करा रहा था। इसके बावजूद फलावदा में उसके खिलाफ पुराना कोई मुकदमा दर्ज नहीं था। स्थानीय स्तर पर बंजारे की जबरदस्त सांठगांठ थी। फलावदा में रहकर वह दूसरे राज्यों में भी गोतस्करी की धंधा चलाता रहा और अकूत संपत्ति अर्जित करता गया। इस संपत्ति का हिस्सा खाकी-खादी को भी जाना बताया गया है। जिसके चलते कभी उसे कोई टोकता नहीं था। संरक्षण देने में एक बड़े नेता का नाम भी शामिल है जिसने बंजारे से कई करोड़ रुपये लिए थे। गोमांस से लदी गाड़ियों को रोकने पर ये नेता ही पुलिस को फोन करते थे।
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गिरफ्तार आरोपी व मेरठ पुलिस को मिला दो लाख इनाम - फोटो : amar ujala
असम पुलिस से बच जाता था बंजारा 
असम पुलिस जब-जब मेरठ आती थी, इसकी जानकारी बंजारे के पास पहले ही पहुंच जाती थी। असम पुलिस ने कई बार उसकी घेराबंदी के लिये स्थानीय लोगों की मदद से जाल फैैलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। असम पुलिस उसको गिरफ्तार कर सकती है, इसको देखते हुए बंजारे ने मेरठ शहर में शास्त्रीनगर और लिसाड़ीगेट में मकान बना लिए। इन मकानों में वह एक-दो दिन रुकता था और फिर फलावदा चला जाता।
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गौ - तसकर, अकबर बंजारा - फोटो : अमर उजाला
बेकसूर थे बेटे, रसूखदारों ने भेद खुलने के डर से मरवा दिए : पीरू बंजारा
फलावदा। उग्रवादियों के हमले में मारे गए गोतस्कर अकबर बंजारे के पिता हाजी पीरू ने अपने दोनों बेटों को बेगुनाह बताते हुए इसे साजिश बताया है। उसने आरोप लगाया है कि तस्करी के कारोबार से जुड़े रसूखदारों ने कोर्ट में भेद खुलने के भय से उसके बेटों को पेशी से पहले मरवा दिया। 

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मेरठ पुलिस ने अकबर की कार को किया था सीज। - फोटो : amar ujala
हाजी पीरू बंजारे ने मीडिया को बताया कि पहले असम में वह पशुओं का व्यापार करता था। करीब पांच वर्ष पूर्व कारोबार उसके बेटों ने संभाल लिया था। असम में कुछ लोगों ने गोवंश पकड़े जाने पर उसके बेटों का नाम लिया था। असम में दो मुकदमों के अलावा उसके बेटों पर कोई अपराधिक मुकदमें दर्ज नहीं थे। पीरू ने पिछले दिनों पुलिस द्वारा फलावदा में पकड़े गए ट्रक में दर्ज किया गया गोकशी का मामला भी उसके बेटों पर लगाया गया था। एक मामले में फैसले के बावजूद पड़ोसी की तहरीर पर फलावदा पुलिस ने रंगदारी का मुकदमा दर्ज कर लिया। पीरू ने कहा कि अकबर के पास एक मकान व एक मार्केट है, जो लोन लेकर बनाई गई थी। 
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मुठभेड़ में बदमाश ढेर। - फोटो : amar ujala
बेटों के शव लेने परिजन असम रवाना 
अकबर के पिता पीरू बंजारे ने बताया कि दोनों बेटों के शव लेने के लिए परिवार के चार लोग असम भेज दिए गए हैं, हालांकि अभी वहां पर उनका पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। 

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गो-तस्कर अकबर बंजारा। - फोटो : amar ujala
गोकशी करने वाला गैंग था अलग 
बंजारे ने गोकशी करने वाला गैंग अलग बनाया हुआ था। ट्रकों में मीट लादकर दूसरे राज्यों में सप्लाई करने वाला दूसरा गैंग था। बंजारे के पास अकूत संपत्ति है और वह गोतस्करी करता है, इसकी जानकारी स्थानीय लोगों व पुलिस को थी। इसके बावजूद बंजारे और उसके भाई को स्थानीय पुलिस ने नहीं पकड़ा। 
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अकबर बंजारा मुठभेड़ - फोटो : amar ujala
बुलेट प्रूफ जैकेट पहने थे दोनों भाई
रिमांड पर लिए दोनों भाइयों को असम पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर बुलेट प्रूफ जैकेट पहना रखी थी। इसके बावजूद वह मारे गए। वहीं बताया गया कि दोनों भाई पुलिस की गाड़ी से भाग नहीं पाए थे।
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