पक्काघाट मंदिर में पोती परी के साथ दादा राजीव गुप्ता
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चौगामा क्षेत्र बसाने वाले राणा गौत्र के चार गांव की कहानी दिलचस्प है। गौत्र मूल रूप से राजस्थान से निकला है, इसके बाद गौत्र के लोगों ने हरियाणा होते हुए पश्चिम यूपी में पहुंचकर सैकड़ों साल पहले निरपुड़ा गांव बसाया था। निरपुड़ा के बाद दादा, भड़ल और गैड़बरा गांव राणा गौत्र के लोगों ने बसाए।
राणा गौत्र के लोगों का मूल गांव निरपुड़ा बन गया, इस वजह से तीन गांव के लोग यहां जन्म लेने वाले बच्चों को भी सम्मान देने के लिए दादा कहते हैं। निरपुड़ा गांव में ही इन चारों गांव की चौधराहट है और वर्तमान में चौधरी कृषिपाल राणा खाप के चौधरी हैं। निरपुड़ा की प्रधान मुनेश देवी कहती हैं कि चारों गांव में निरपुड़ा को सम्मान देने के लिए सालों से परंपरा चली आ रही है।