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अजीब है यूपी का ये गांव, यहां जन्म लेते ही बच्चे बन जाते हैं 'दादा', दिलचस्प है पूरी कहानी

Mon, 09 Sep 2019 07:23 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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बागपत के ठाकुरद्वारा मोहल्ले में स्थित घर में रो रही पोती को खिलाते दादा मास्टर आनंद शर्मा - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बागपत जिले में निरपुड़ा गांव ऐसा है, जहां जन्म लेते ही बच्चों को दादा (बाबा) का औहदा मिल जाता है। तीन गांव के लोग निरपुड़ा के छोटे बच्चे से लेकर बड़े व्यक्ति तक को दादा कहकर पुकारते हैं। सैंकड़ों साल से यह परंपरा है। राणा गौत्र के अन्य गांव के लोग भी निरपुड़ा के लोगों को सम्मान के तौर पर दादा कहते हैं। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ पढ़िए पूरी कहानी...
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पक्काघाट मंदिर में पोती परी के साथ दादा राजीव गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
चौगामा क्षेत्र बसाने वाले राणा गौत्र के चार गांव की कहानी दिलचस्प है। गौत्र मूल रूप से राजस्थान से निकला है, इसके बाद गौत्र के लोगों ने हरियाणा होते हुए पश्चिम यूपी में पहुंचकर सैकड़ों साल पहले निरपुड़ा गांव बसाया था। निरपुड़ा के बाद दादा, भड़ल और गैड़बरा गांव राणा गौत्र के लोगों ने बसाए।

राणा गौत्र के लोगों का मूल गांव निरपुड़ा बन गया, इस वजह से तीन गांव के लोग यहां जन्म लेने वाले बच्चों को भी सम्मान देने के लिए दादा कहते हैं। निरपुड़ा गांव में ही इन चारों गांव की चौधराहट है और वर्तमान में चौधरी कृषिपाल राणा खाप के चौधरी हैं। निरपुड़ा की प्रधान मुनेश देवी कहती हैं कि चारों गांव में निरपुड़ा को सम्मान देने के लिए सालों से परंपरा चली आ रही है।
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निरपुड़ा गांव की प्रधान मुनेश देवी - फोटो : अमर उजाला
वह कहती हैं कि दादी-दादी या नाना-नानी से बच्चों का खास लगाव होता है। इंटरनेट, कंप्यूटर और मोबाइल क्रांति से पहले बच्चे दादी-दादी या नाना-नानी से कहानियां सुनते हुए ही बड़े होते थे। बालमन पर बड़ों की छाप अमिट होती थी। रिश्ते की मिठास ऐसी थी कि बच्चे नाना-नानी के घर जाने के लिए सालभर तक इंतजार करते और उतावले रहते थे।

गर्मी की छुट्टियों के दिन नानी के घर बीतते। यहां होती मौज मस्ती और कितनी ही कहानियां। दौर बदला तो समाज में संयुक्त परिवार टूटने लगे। दादा-दादी और नाना-नानी के बजाए गूगल और यू-ट्यूब जैसे प्लेटफार्म से अब नए दौर के बच्चे दुनिया देख और सीख रहे हैं। लेकिन आज भी बड़ों की बातें प्रासंगिक हैं।

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बागपत के ठाकुरद्वारा मोहल्ले में स्थित घर में रो रही पोती को खिलाते दादा मास्टर आनंद शर्मा - फोटो : अमर उजाला
हमें याद हैं अपने दादा-दादी की कहानियां

श्री यमुना इंटर कॉलेज में शिक्षक मास्टर आनंद शर्मा और व्यापारी राजीव गुप्ता कहते हैं कि उन्हें अपने दादा दादी और नाना-नानी की कहानियां याद हैं। दादा-पोते और दादी-पोती का रिश्ता बेहद ही खास होता था। इस रिश्ते जैसी मिठास दुनिया में कहीं नहीं मिलती।
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शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
शूटर दादियों ने लिख दी नई इबारत

जौहड़ी गांव की शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर ने नई इबारत लिखी है। लड़कियों को शूटिंग के लिए प्रेरित किया और उम्मीदों के नए पंख लगाएं। उम्र का रोना रोने वाले लोगों के सामने उदाहरण बनकर खड़ी हो गई। दोनों दुनिया की सबसे वयोवृद्ध शूटर हैं और इनकी कामयाबी पर बनीं फिल्म सांड़ की आंख दिवाली पर रिलीज होगी।

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बच्चों के साथ दादा तेजपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
पोतियां बताती हैं इंटरनेट की बातें

लुहारी गांव निवासी तेजपाल सिंह नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनका अधिकतर समय अब पोती गोली और मौली के साथ बीतता है। वह बताते हैं कि दोनों उसे इंटरनेट और कंप्यूटर का ज्ञान देती हैं। उनकी पसंद की हर चीज लैपटॉप पर खोजकर रख देती हैं। तीसरे पीढ़ी से जुड़ाव का रिश्ता बेहद खास महसूस होता है।
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असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्नेहवीर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बड़ों से घुलने-मिलने दें : डॉ. स्नेहवीर

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्नेहवीर का कहना है कि रिश्तों की मिठास बचाने के लिए समाज को ही आगे आना होगा। बच्चों को घर के बड़ों से घुलने मिलने दें और परिवार में उनके महत्व की जानकारी जरूर दें। बड़ों का सम्मान करना सिखाएं।

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