अंदाज-ए-बरबाद है इश्क, देखो तो राजा को रंक बना दे इश्क,
मगर तवायफ से महारानी बनीं समरू, हुस्न-ओ-हौसला हो तो क्या न करा दे इश्क।
मोहब्बत और हिम्मत की इस कहानी का ऐसा ही बेजोड़ किरदार हैं बेगम समरू, फरजाना, जेबुन्निशां या फिर जोहान नोबोलिश सोम्ब्रे। कई शख्सियतों वाली एक ऐसी महिला जो दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित एक कोठे से निकलकर दौलत शोहरत और ताकत की उन बुलंदियों तक पहुंची जिन्होंने उन्हें हिंदुस्तानी इतिहास का एक दिलचस्प पन्ना बना दिया। बेगम समरु को आखिर कैसे मिले अलग अलग नाम, आज हम आपको इसके पीछे की कहानी से रुबरू कराते हैं:-