उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित बिकरू कांड के आठवें दिन भले ही विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया लेकिन इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद उसका बचकर भाग निकलना रहस्य बन कर रह गया था। फरारी के समय वह कहां रहा, कैसे फरार हुआ आदि बातों का अबतक पता नहीं चलने से लोगों में तो जिज्ञासा थी ही लेकिन पुलिस की पड़ताल में यह अहम कड़ी छूट रही थी।
विज्ञापन
2 of 7
अमर दुबे और विकास दुबे
- फोटो : सोशल मीडिया
एसटीएफ ने सोमवार को इस रहस्य से भी पर्दा उठा दिया। एसटीएफ ने फरारी के समय विकास के मददगार और आश्रय देने वालों समेत सात लोगों को गिरफ्तार करके पूरी हकीकत सामने लाकर रख दी है। सोमवार को एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने गिरफ्तार विकास के सहयोगियों के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
3 of 7
विकास दुबे का साथी अमर दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
उनके मुताबिक सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद विकास दुबे, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा बिकरू गांव से भागकर शिवली पुल के पास जाकर छुप गए थे। प्रभात मिश्रा ने अपने मित्र विष्णु कश्यप से संपर्क किया और उसे शिवली नदी के पास बुलाया। इसपर विष्णु कश्यप शिवली निवासी अपने दोस्त छोटू की स्विफ्ट डिजायर कार लेकर आया।
4 of 7
अमर दुबे
- फोटो : अमर उजाला
कार में अभियुक्तों को बिठाकर हथियार रखे गए। इसके बाद विष्णु कश्यप के बहनोई रामजी उर्फ राधे के घर तुलसीनगर रसूलाबाद सभी अभियुक्त पहुंचे। उसके घर पर बने तलघर में सभी छिप गए। यहां से अभिषेक उर्फ छोटू अपनी कार लेकर वापस चला गया। पुलिस के मुताबिक 3 जुलाई 2020 की दोपहर लगभग 12:00 से 1:00 बजे के बीच रामजी उर्फ राधे अपनी मोटरसाइकिल से अमर दुबे को रसूलाबाद से करिया झाला में संजय परिहार उर्फ टिंकू की बगिया ले गया।
विज्ञापन
5 of 7
अमर दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
वहां पर संजय परिहार, अभिनव तिवारी, अर्पित मिश्रा, विक्की यादव, अमन शुक्ला और मोहन अवस्थी मौजूद थे। अमर दुबे ने उत्तम मिश्रा से रुकवाने की व्यवस्था करने के लिए कहा था। उसने अमर दुबे को अपने खेत के ट्यूबवेल वाली कोठरी में रुकवा दिया। इसके बाद रामजी और अभिनव तिवारी दो मोटरसाइकिल से तुलसी नगर रसूलाबाद लौट गए। पुलिस के मुताबिक रसूलाबाद तुलसी नगर में विकास दुबे और प्रभात मिश्रा ठहरे थे।
विज्ञापन
6 of 7
विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
उसी दिन शाम पांच बजे छोटे हथियारों के साथ लेकर दोनों मोटरसाइकिल से उत्तम मिश्रा के ट्यूबवेल पर गए। विकास दुबे ने झींझक में कोई कमरे की व्यवस्था करने के लिए कहा लेकिन व्यवस्था नहीं हो सकी। इस बीच विकास दुबे दैनिक समाचार पत्र मंगाकर पढ़ता रहा और आगे की रणनीति बनाता रहा।
पांच जुलाई की शाम को शुभम पाल की ओमनी कार से विकास दुबे, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा को औरैया बस स्टैंड तक छोड़ा गया। यहां से तीनों फरीदाबाद हरियाणा पहुंचे। एसटीएफ के मुताबिक फरीदाबाद से विकास दुबे महाकाल के मंदिर कैसे पहुंचा, इसकी कड़ी अभी तक नहीं मिली है। इस बारे में भी सूत्र तलाशे जा रहे हैं।