सिंथेटिक सिरके में मिलावट पर 40 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाकर पांच लोगों को छह माह की कैद की सजा सुनाई है। महानगर मजिस्ट्रेट प्रथम की कोर्ट ने सिरका बेचने और बनाने वालों को दोषी माना है। फर्म के साथ-साथ व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया गया है। एक अभियुक्त का निधन होने से उसका नाम केस से निकाल दिया गया था। मिलावट के मुकदमों में यह जिले का सबसे पुराना लंबित मामला था। एक और मुकदमे में कोर्ट ने 18 साल बाद मिलावट करने वाले को छह माह कैद और 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।
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आर्य नगर स्थित भारत डेयरी एंड बेकरी से पांच अप्रैल 1978 को सिंथेटिक सिरके का नमूना एकत्र किया गया था। मिलावटी निकलने पर मुकदमा दाखिल कर दिया गया। यह सिरका फर्रुखाबाद के विजय इंटरप्राइजेज ने बनाया था। कोर्ट ने दोनों फर्मों को दोषी मानते हुए भारत डेयरी एंड बेकरी के मालिक विनोद कुमार निवासी आर्य नगर को छह माह की कैद, फर्म पर 50 हजार और विनोद पर 20 हजार का जुर्माना लगाया।
विजय इंटरप्राइजेज के राम प्रकाश कटियार, चंद्र प्रकाश कटियार, सुरेश चंद्र कटियार और ओम प्रकाश कटियार को छह माह कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फर्म पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
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वहीं, एक दूसरे मुकदमे में कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया फूड्स नवाबगंज के मैनेजर विजय कुमार गुप्ता को छह माह कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यूनाइटेड इंडिया फूड्स से 21 नवंबर 1990 के केसर का नमूना लिया गया था। इसमें मिलावट निकली थी। इन दोनों मुकदमों में अभियोजन पक्ष की तरफ से अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने पैरवी की। ये फैसले 30 अगस्त को एक ही कोर्ट ने सुनाए।