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रातों की नींद उड़ा देंगी ‘दिव्य आस्था’ की ये अजब-गजब तस्वीरें...

Wed, 05 Apr 2017 07:41 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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इस तरह शरीर में सुइयां और मुंह में सांग लगाकर जाते हैं भक्त
यूं तो आपने मंदिरों के इतिहास, आस्था और चमत्कारों के बारे में कई कहानियां सुनी होंगी। लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक ऐसा अनोखा देवी मंदिर है जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते होंगे। विशेषतौर पर चैत्र नवरात्र में यहां कुछ ऐसा देखने को मिलता है जो हैरान कर देने वाला होता है। 
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इस तरह मुंह में सांग लगाकर निकलते हैं देवीभक्त
देवी की भक्ति में डूबे इन लोगों के शरीर के अंगों में घुसी नुकीली सुईयां और बड़े-बड़े सांगों को देखकर हैरानी जरूर होती है लेकिन ऐसा यहां हर साल देखने को मिलता है। कानपुर और आसपास के जिले में रहने वाले लोगों के लिए ये दृश्य आम से लगते हैं लेकिन दूसरे शहरों से आए लोगों के लिए देवीभक्तों द्वारा दिखाये जा रहे ये खतरनाक करतब रातों की नींद उड़ा देने वाले साबित होते हैं।
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देवी मां की मूर्ति
कानपुर शहर के जूही मोहल्ले के पास स्थित बारा देवी मंदिर में आने वाला हर भक्त अपनी मनोकामना मांग कर चुनरी बांधता है, तो कहीं पर श्रद्धालु मां को रिझाने के लिए खतरनाक करतब भी दिखाते हैं। यहां कोई आग से खेलता है तो कोई अपने गाल के आरपार नुकीली धातु पार कर दिखाता है।  

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शरीर में सुइयां लगाकर जाता भक्त
देवीभक्त सुनील कुमार ने बताया कि वह पिछले 8 सालों से इस जवारे में शामिल होकर मुंह में सांग लेकर चलते आ रहे है। ये कोई अंधविश्वास नहीं ये हमारी आस्था है। इसे वही लोग निकालते हैं, जिनकी मनोकामना देवी दुर्गा पूरी करती हैं या जिन्हें कोई मन्नत मांगनी होती है।
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मुंह में सांग लगाकर जाती भक्त
मोहल्ले का पुजारी एक-एक करके सांग का नुकीला हिस्सा भक्तों के मुंह के अंदर डालते हुए एक गाल में खोस देता है। गाल को छेद कर निकले हिस्से में पुजारी नींबू या फूल लगा देता है। कुछ भक्तों का तो यहां तक कहना है कि जो अपने शरीर पर जीतनी ज्यादा सूइयां चुभोता है, उसकी मन्नतें उतनी ही जल्दी पूरी होती है। यानी जो खुद को जितना ज्यादा कष्ट देगा मां उससे उतनी ज्यादा प्रसन्न होंगी। 
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मुंह में सांग लगाकर जाते भक्त
मंदिर के पुजारी दीपक का कहना है कि लोहे के बने इस सांग और सुइयों को शरीर से निकालने के बाद भक्तों को कोई दवा नहीं दी जाती है। दूर दराज से आने वाले भक्त यहां के प्रमुख मंदिर बारादेवी, ज्वालादेवी और चंद्रिका देवी के मंदिर में अपनी यात्रा समाप्त करते हैं।
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बारादेवी मंदिर
इस बारादेवी मंदिर के इतिहास के बारे में सटीक जानकारी तो किसी के पास भी नहीं है लेकिन मंदिर में रहने वालों का कहना है कि कुछ समय पहले एएसआइ की टीम ने इस मंदिर का सर्वेक्षण किया था जिसमें पता चला था कि मंदिर की मूर्ति लगभग 15  से 17 सौ वर्ष पुरानी है।
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बारादेवी मंदिर
पुजारी दीपक ने बताया कि इस मंदिर से जुड़ी एक कथा बेहद प्रसिद्ध है, एक बार पिता से हुई अनबन पर उनके कोप से बचने के लिए घर से एक साथ 12 बहनें भाग गई। सारी बहनें किदवई नगर में मूर्ति बनकर स्थापित हो गई। पत्थर बनी यही 12 बहनें कई सालों बाद बारादेवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुई। कहा जाता है कि बहनों के श्राप से उनके पिता भी पत्थर हो गए थे। ये कानपुर का सबसे प्राचीन मंदिर है यहां हर साल नवरात्र पर हजारों-लाखों भक्त मत्था टेकने आते हैं। 
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