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अक्षय तृतीया पर समझदारी से करें खरीदारी, जरा सा चूके तो लग जाएगा चूना, ऐसे करें पहचान

Fri, 03 May 2019 04:46 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया पर्व सात मई को मनाया जाएगा। पर्व के दिन बड़े पैमाने पर सोने के आभूषणों की बिक्री होती है। ग्राहकों में तेजी से हॉलमार्क आभूषण खरीदने का क्रेज बढ़ा है। कानपुर के कई सराफा केवल हॉलमार्क ज्वैलरी ही बेचते हैं। हालांकि हॉलमार्क ज्वैलरी के नाम पर फर्जीवाड़ा की भी आशंका रहती है।
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अक्षय तृतीया
कुछ दिनों पहले शहर के चौक में नकली हॉलमार्क निशान लगे ज्वैलरी के साथ दो बदमाश पकड़े गए थे। सराफा व्यापारियों ने इन बदमाशों को पुलिस से पकड़वाया था। दो दिन पहले बनारस में भी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की टीम ने शिकायत पर कार्रवाई की तो चार हॉलमार्क सेंटर बिना लाइसेंस के संचालित पाए थे। इसके बाद से शहर के व्यापारी भी अलर्ट पर हैं। 

 
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अक्षय तृतीया
कानपुर महानगर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि हॉलमार्क ज्वैलरी खरीदने के बाद शोरूम या संस्थान से हॉलमार्क ज्वैलरी का दस्तावेज जरूर लें। ग्राहक भरोसे के सराफा से ही ज्वैलरी आदि खरीदता है लेकिन एक बार किसी दूसरे या तीसरे सराफा से भी इसे चेक कर लें।

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अक्षय तृतीया
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के मंत्री राम किशोर मिश्रा ने बताया कि सोने की ज्वैलरी भरोसे वाले दुकानदार से खरीदें। बड़े ब्रांड की ज्वैलरी ले रहें हैं तो भी एक बार दूसरे से जंचवा लें। ऐसा न हो कि आपने 24 कैरेट का माल खरीदा हो और दुकानदार ने 18 या 22 कैरेट की ज्वैलरी आपको थमा दी हो।

 
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अक्षय तृतीया
हॉलमार्क ज्वैलरी पर वर्ष कोड, मानक का चिह्न, सोने की मात्रा, परीक्षण केंद्र का निशान और आभूषण विक्रेता का नाम लिखा होता है। 

 
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अक्षय तृतीया
यदि ज्वैलरी पर 916 दर्ज है तो इसका तात्पर्य होगा कि 91.6 फीसदी सोना शुद्ध होगा। 750 लिखा होने पर 75 फीसदी सोना शुद्ध होगा।

 
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अक्षय तृतीया
देश में साल 2000 से सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग शुरू हुई थी। मौजूदा समय में शहर में 33 कारोबारियों के पास लाइसेंस हैं। जो भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेने के बाद ही इसे संचालित करते हैं। यदि किसी को कोई शिकायत है तो लखनऊ स्थित बीआईएस कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं। किसी ज्वैलरी पर हॉलमार्क लगाने के लिए 35-50 रुपये खर्च आता है।
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