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कमाल का बिजनेस आइडिया: नौकरी के साथ-साथ बना रहे नई पहचान, तानों को दरकिनार कर जीत रहे लोगों का दिल, तस्वीरें

Sat, 13 Nov 2021 10:11 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
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चाय बनाते युवक। - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में दो दोस्तों के मन में नौकरी के साथ-साथ एक कमाल का बिजनेस आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने पार्ट टाइम में अपना बिजनेस शुरू कर दिया। हालांकि शुरू में उन्हें अपनों व रिश्तेदारों से काफी ताने मिले। लेकिन उन्होंने तानों को दरकिनार कर अपने बिजनेस पर फोकस रखा। आज इसका नतीजा यह है कि लोग नाम से ही उनकी शॉप पर चाय की चुस्की लेने आते हैं।  

कहते हैं कि मन में चाह हो तो रोजगार खुद-ब-खुद चल जाता है। बिजनौर के एमबीए और बीबीए पास दो दोस्तों ने नगर पालिका से अनुमति लेकर सड़क किनारे ‘चरसी चाय’ के नाम से टपरी खोल दी। दोनों दिनभर नौकरी करने के बाद करीब पांच घंटे चाय बनाकर बेचते हैं। ऐसा भी नहीं कि दोनों बेरोजगार हैं। ज्ञान विहार निवासी एमबीए पास आशु चौधरी बिजनौर में ही एक मोबाइल कंपनी में टीम लीडर है। नई बस्ती निवासी बीबीए पास जुनैद सहल एक जीएसटी वकील के पास नौकरी करते हैं।
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बिजनौर में फेमस चाय की दुकान। - फोटो : amar ujala
दोनों ने नौकरी करने के साथ ही अपना कुछ नया काम करने की सोची और किरतपुर रोड पर एक कपड़े के शोरूम के पास शाम को पार्टटाइम चाय की टपरी शुरू कर दी। कपड़े के शोरूम पर आने वाले और यहां से गुजरने वाले लोग इनके हाथ की चाय पीने जा रहे हैं। आशु और जुनैद की मानें तो शाम सात बजे से रात 12 बजे तक 200 से 250 लोग चाय पीने पहुंचते हैं। जुनैद चाय बनाता है और आशु उसे देने व पैसों का हिसाब-किताब रखता है।
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चाय बनाता युवक। - फोटो : amar ujala
यूट्यूब से आया तंदूरी चाय का विचार
आशु और जुनैद को चाय बनानी नहीं आती थी। इन्होंने यूट्यूब पर तंदूरी चाय बिकती देखी और उसी से चाय बनाना सीखा। दो से तीन घंटे में ही पूरे तंदूर के कुल्हड़ खत्म हो जाते हैं।

ऐसे आया नाम का विचार
चरसी नाम रखे जाने के बारे में इनका कहना है कि चरसी का मतलब चरस का लती होता है। इन्होंने यह नाम रखा, जिससे लोग इनके पास चाय पीने के लिए खिंचे चले आए।

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चाय देता युवक। - फोटो : amar ujala
नाम चरसी, खुशबू गुलाब की
दोनों दादोस्त चाय में लोंग, इलायची, काली मिर्च, दालचीनी और खड़े साबुत मसालों के साथ गुलाब की सूखी पंखुड़ी का भी इस्तेमाल करते हैं। इन्हें ग्राहकों के सामने ही डालते हैं, इससे भरोसा बन रहा है।
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charsi Chaay, चरसी चाय - फोटो : अमर उजाला
तानों से नहीं हुए विचलित : आशु
दिनभर मैं नौकरी करता हूं। हमने चाय का काम शुरू किया तो लोगों ने ताने मारे, हम पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अपना काम है और अच्छी आमदनी भी हो रही है। - आशु चौधरी

अपनों ने ही किया विरोध: जुनैद
मेरे कुछ खास लोगों को पता चला कि मैं अपने दोस्त के साथ चाय बनाकर बेच रहा हूं तो उन्होंने इसका विरोध किया। हमने उन्हें मना लिया। अब अच्छा परिणाम आ रहा हैं। - जुनैद
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