Prayagraj News : संपेरों का परिवार।
- फोटो : प्रयागराज
कोई सपा तो कोई भाजपा के साथ
कुछ दूर बढ़ने पर इस सपेरों की बस्ती में राजा कमलाकर इंटर कॉलेज से 10वीं पास ओमप्रकाश से मुलाकात हो जाती है। ओम प्रकाश सांपों का तमाशा दिखाने की बजाए एनटीपीसी में काम थाम लिए हैं। वह डंके की चोट पर कहते हैं कि सपा भी लड़ रही है, लेकिन सपेरा समाज इस बार मोदी-योगी के साथ है। योगी जीतें या हारें, वो अपनी जगह है, लेकिन हम वोट योगी को ही देंगे। अब स्कूल खुलता है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई शुरू हो गई है।
गल्ला महीने में दो बार मिल रहा है। तेल, चना, नमक सबकुछ साथ में। भरपूर मिल रहा है, कोई नुकसान भी नहीं है। फिर, लल्लन नाथ से मुलाकात होती है। उनके चार पुत्रों में रोहित नाथ, ताबीज नाथ, वीर नाथ, तस्वीर नाथ समेत पांच सांप हैं। यानी घर के हर सदस्य के पीछे एक सांप। लल्लन ने बताया कि उन्होंने सुबह खुद सांपों को चावल का मांड़ पिलाया है। इसे बाद चारों बेटे सांप नचाने निकल गए हैं।
दोनों बेटे खेल दिखाने सांपों के पिटारे लेकर निकल गए हैं। शाम तक कोई दो सौ तो कोई पांच सौ लेकर घर आ जाता है। इससे परिवार का गुजारा मजे से हो रहा है। वह कहते हैं कि इस बार कांटे की टक्कर सुनाई दे रही है। सपा का बोलबाला सुनाई दे रहा है। इस बार क्या होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता।
मामला पलट भी सकता है। इस भीड़ में किशन नाथ अपनी बात कहने लगते हैं। वह कहते हैं कि चाहे किसी की सरकार रही हो, विकास कभी नहीं हुआ। हम लोग सांप पकड़ते, छोड़ते ही रह गए। सरकारी आवास तो मिला, लेकिन किसी की छत पड़ी है तो किसी की नींव नहीं पड़ी। फिर भी कोई बात नहीं। जो मिला , उसी से संतोष है। भइया जी, हम सपेरे हैं, सपेरे ही रहेंगे।