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विश्वास करना हो रहा मुश्किल कि यह प्रयागराज है, नाव सड़कों पर, हजारों बेघर

Mon, 16 Sep 2019 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
शहर में बाढ़ का दायरा और बढ़ता जा रहा है। रविवार को चेतावनी बिंदु पार करने के बाद गंगा डेंजर जोन में प्रवेश कर गई। शाम तक गंगा खतरे के निशान 84.73 मीटर से महज 61 सेमी नीचे बह रही थी। जलस्तर में वृद्धि से झूंसी, नैनी, मेजा, फूलपुर आदि क्षेत्र के 100 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, वहीं शहर के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में अब वाहनों के बजाय नावें चलनी शुरू हो गई हैं। करीब पांच हजार लोगों ने घर छोड़ दिया है। 
 
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
रविवार दोपहर डीएम ने राहत शिविरों में प्रबंधों की जानकारी ली। साथ ही बाढ़ से निबटने के लिए हर स्तर पर तैयार रहने के निर्देश दिए। शाम छह बजे सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन के अनुसार गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 84.02 मीटर, छतनाग में 83.30 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 83.88 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा में रविवार को हरिद्वार से 32 हजार 428 क्यूसेक, नरोरा से 33 हजार 101 क्यूसेक और कानपुर से 1.52 लाख 028 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते हजारों घरों में पानी भरने से चूल्हा जलाने का संकट पैदा हो गया है। 
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प्रयागराज में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
झूंसी के तटवर्ती इलाकों में स्थिति बिगड़ी
गंगा-यमुना में आई बाढ़ से झूंसी के तटवर्ती इलाकों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कछारी इलाके के कुछ गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिरने के कारण टापू में तब्दील हो गए हैं। पिछले तीन दिनों से गांव के लोग रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए तरस गए हैं। नई तथा पुरानी झूंसी के मकानों का निचला हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। प्रशासन की ओर से दी जा रही मदद ग्रामीणों के लिए नाकाफी साबित हो रही है। शहर के कछारी इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से हजारों लोगों की नींद उड़ गई है। द्रौपदी घाट, छोटा बघाड़ा, सलोरी, शंकरघाट, बेली कछार, शिवकुटी, मेंहदौरी, रसूलाबाद, राजापुर, नेवादा, बक्शीमोढ़ा, गौसनगर, सदियापुर, करेलाबाग समेत अन्य मोहल्लों में रहने वाले लोग सुरक्षित ठिकाना तलाशने लगे हैं।



 

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
गंगा-यमुना के तेजी से बढ़ रहे जल स्तर के कारण शहर के आधा दर्ज स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इनमें से पांच स्कूलों को राहत शिविर बनाए जाने के कारण बंद कर दिया गया है जबकि एक स्कूल में बाढ़ का पानी घुस गया है। जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो सोमवार तक कुछ अन्य स्कूल भी बंद हो सकते हैं। गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने के कारण कछारी इलाकों के हजारों घरों में पानी घुस गया है और लोग राहत शिविर में पहुंच रहे हैं। ज्यादातर राहत शिविर स्कूलों में बनाए गए हैं।
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के निर्देश पर बाढ़ राहत शिविर बनाए गए ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजापुर, एनी बेसेंट बालिका इंटर कॉलेज बघाड़ा, महबूब अली इंटर कॉलेज स्टेनली रोड और स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज राजापुर और कैंट हाईस्कूल कैंट को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। उधर, बघाड़ा में प्राथमिक विद्यालय बालक ढरहरिया में बाढ़ का पानी घुस जाने से स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद और प्राथमिक विद्यालय राजापुर की ओर से भी बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। अगर जलस्तर बढ़ने की यही गति रही तो सोमवार तक इन स्कूलों को भी बंद किया जा सकता है। 
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
गंगा और यमुना के जल स्तर में बढ़ोतरी का क्रम लगातार जारी है। इसकी चपेट में शहर के कछारी मोहल्लों में रहने वाले  सैकड़ों परिवार आ गए हैं। तमाम मकानों में बाढ़ का पानी घुस जाने से लोगों ने राहत शिविरों में शरण लेनी शुरू कर दी है। रविवार की शाम तक राहत शिविरों में 600 से  लोगों ने शरण ले रखी थी। शहर में अपना अशियाना होने के बावजूद राहत शिविर में लोग शरणार्थी (रिफ्यूजी) के रूप में रहने को मजबूर दिखाई दिए। इस बीच प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट बांटे गए, लेकिन यह पैकेट उन्हें ही मिले जिन्होंने अपना नाम राहत शिविर के रजिस्टर में दर्ज करवा रखे थे। 
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
जिला प्रशासन की ओर से शहर में 31 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। रविवार तक पांच शिविर में बाढ़ से प्रभावित लोगों ने रहना शुरू कर दिया। राजापुर स्थित ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सर्वाधिक 170 लोगों ने शाम तक वहां अपनी इंट्री करवा दी थी। इस शिविर में राजापुर के श्याम लाल पांडेय भी अपने परिजनों के साथ यहां शरण ले रखी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में भी बाढ़ की वजह से उन्हें शिविर में जगह लेनी पड़ी थी। तब बाढ़ के बाद बताया गया थी गंगा का पानी  मोहल्ले में न घुसे इसके लिए तटबंध बनाया जाएगा।

 

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बाढ़ की चपेट में आए झूंसी, नैनी, मेजा, फूलपुर आदि क्षेत्र के गांवों समेत शहर के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों के लोगों ने गृहस्थी का सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन शुरू कर दिया है। कुछ लोग अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं, ऐसे में उन्होंने अपने मकानों की छतों पर डेरा डाल लिया है।

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
रविवार को कछारी इलाकों के सैकड़ों घरों में पानी घुसा गया।  बाढ़ प्रभावित मोहल्लों मे दिन भर नावें चलीं। करीब पांच हजार लोगों ने घर छोड़ दिया। कई लोगों ने नाव से सामान की ढुलाई कर छतों पर ठिकाना बनाया। दोपहर बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली काट दिए लोगों की परेशानी और बढ़ गई। वहीं शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रौपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों के 1500 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। राजापुर समेत अन्य कछारी इलाकों में रहने वालों में बाढ़ की दहशत साफ दिखी। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही। बक्शी बांध के नीचे गंगा जल से लबालब इलाके में दर्जनों घरों के निचले तल पर एक से तीन फीट पानी भर गया। सामान समेट कर दूसरी मंजिल या छत पर पहुंचाने में पड़ोसियों ने एक दूसरे की मदद की।

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
छोटा बघाड़ा के भृगु मार्ग पर बाढ़ का पानी आने से नाव चलने लगी है। पाल चौराहे के पास और कृष्णा नगर में रहने वाले लोगों की नींद ही उड़ गई है। यहां रहने वाले अविनाश दुबे, प्रेम प्रकाश शुक्ला, जगन्नाथ शाह, सुनील कुमार मोहल्ले वालों के साथ रतजगा करने को मजबूर हैं। अविनाश ने बताया कि नदी किनारे बने सैकड़ों घर बाढ़ के पानी से घिरे हैं। यहां मवेशी भी फंसे हैं। उन्होंने बताया कि घर नहीं छोड़ेंगे छत पर रहेंगे। परेशानी उन लोगों की ज्यादा है, जिनके पास दूसरी मंजिल के नाम पर अभी खुली छत ही है। वहीं घाट किनारे बस्ती में रहने वाले एहतियातन सामान समेटने की तैयारी करते रहे।

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

छात्रों ने समेटी किताबें

छोटा बघाड़ा, सलोरी समेत अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में लॉज या किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों भी खासे चिंतित रहे। मनोज वर्मा, दीपक, सौरभ पाल, प्रदीप ने बताया कि सामान और किताबें समेट ली हैं। बिजली है नहीं तो दोस्तों के यहां जाकर रहेंगे। भूतल पर रहने वाले सैकड़ों छात्रों ने अपने-अपने मकान मालिक के दूसरे तल के कमरे में सामान रख दिया है। 

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प्रयागराज में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

कछारी मोहल्लों में रहने वाले दहशत में

शहर के कछारी इलाकों में रहने वाले बाशिंदे दो दिन से बाढ़ के पानी को ताक रहे हैं। कोई परिचितों से बाढ़ का हाल पूछता है तो कोई कंट्रोल रूम से जलस्तर के बारे में जानकारी लेता है। राजापुर में किनारों पर रहने वालों ने तो घर छोड़ दिया है। अन्य सामान समेटने का काम कर रहे हैं। द्रौपदी घाट, छोटा बघाड़ा, सलोरी, शंकरघाट, बेली कछार, शिवकुटी, मेंहदौरी, रसूलाबाद, राजापुर, नेवादा, बक्शीमोढ़ा, गौसनगर, सदियापुर, करेलाबाग समेत अन्य मोहल्लों में रहने लाखों की आबादी पर बाढ़ का खतरा है। जहां पानी नहीं पहुंचा, वह भी संभावित खतरे की भयावहता से लोग परेशान हैं। इन मोहल्लों में रहने वाले हर घंटे बढ़ रहे जलस्तर से होने वाली दिक्कत की आशंका से सहमे हैं।

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

बत्ती कटने से पानी का संकट

बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग बिजली गुल होने के कारण पीने के लिए पानी जुटाने में लगे रहे। सर्वाधिक सतर्क छात्र रहे। कुछ बिना गाड़ी का इंतजार कर साइकिल या स्कूटी से ही पानी की बोतल लेकर आए। छोटा बघाड़ा में अजीत कुमार यादव, सलोरी के शरण सिंह, राजापुर में हिमाकत पाल  आदि खुद पानी की बीस लीटर वाली बोतल साइकिल पर ले जाते दिखे। इन मोहल्लों के आरओ वाटर प्लांट चलाने वालों के यहां पानी लेने की होड़ मची थी। फिलहाल उन्हीं को पानी मिल पा रहा था, जो नियमित ग्राहक थे या जिन्होंने बोतल के लिए जमानत राशि जमा कराई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी के लिए देर रात तक हायतौबा मची रही।
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प्रयागराज में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

गांवों में कहीं सड़क गुम तो कहीं खेत लबालब, फसल चौपट

बाढ़ का कहर ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा है। प्रभावित इलाकों में कहीं सड़क तो कहीं चक मार्ग पानी भरने से गुम हो गए हैं। वहीं खेतों में भरे बाढ़ के पानी से फसलों को बर्बाद कर रहा है। नैनी, करछना इलाके में परवल की खेती करने वाले परदेसी किसानों को फसल डूबने से भारी नुकसान हुआ है। इसी तरह फूल और सब्जियों की खेती को भी बाढ़ ने चौपट कर दिया है। किसानों के मुताबिक इस बार मौसम के साथ बाढ़ की दोहरी मार ने उन्हें बड़ी आर्थिक चोट दी है।
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