फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रयागराज में विकराल हुईं गंगा-यमुना, कछार की बस्तियां जलमग्न

Sun, 15 Sep 2019 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
1 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
लगातार जलस्तर बढ़ने से शनिवार की शाम गंगा-यमुना ने विकराल रूप धारण कर लिया। दोनों नदियां चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई हैं। तेजी से बढ़ते जलस्तर के चलते बाढ़ के पानी ने निचले इलाकों में बने सैकड़ों घरों को चपेट में ले लिया। इस बीच बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों को नावों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बाढ़ आपदा से निबटने के लिए प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। शाम छह बजे गंगा-यमुना चेतावनी बिंदु से 39 सेमी और खतरे के निशान से सिर्फ 1.39मीटर नीचे बह रही थीं।

सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम के अनुसार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 83.34 मीटर, छतनाग में 82.58 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 83.28 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा में 2.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से जल दबाव और बढ़ने के संकेत मिले हैं। इस दिन गंगा में हरिद्वार से 44,820 क्यूसेक, नरोरा में 42,381 क्यूसेक और कानपुर बैराज से 1.60 लाख, 292 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोपहर बाद ही नागवासुकी-बक्शीबांध मार्ग डूब गया। देर शाम दारागंज जाने वाली रामघाट, दशाश्वमेध घाट की सड़क से ऊपर पानी आ गया।



श्मशान घाट डूबने से अंतिम संस्कार में भी दिक्कतें आने लगी हैं। तीर्थपुरोहितों की चौकियां और पूजा-प्रसाद बेचने वाले बांध पर पहुंच गए। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अभियंताओं के मुताबिक हमीरपुर में यमुना के जल स्तर में तेजी बनी हुई है। इससे यहां भी जलस्तर बढ़ने की आशंका है। फिलहाल इससे प्रयागराज में गंगा-यमुना के जल स्तर में और तेजी के संकेत मिले हैं। उधर, गंगा-यमुना में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ राहत चौकियों पर इंतजाम शुरू कर दिए हैं। एसडीए व तहसीलदारों को प्रभावित इलाकों पर नजर रखने और लोगों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन

2 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
गंगा-यमुना में उफान से शनिवार को कछारी इलाके पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए। बाढ़ ग्रस्त इलाकों में दिन-रात गृहस्थी बचाने की मशक्कत चल रही है। तटीय बस्तियों में पानी घुसने के बाद देर रात तक सैकड़ों परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों, रिश्तेदारों या परिचितों के यहां शरण लेनी पड़ी। द्रोपदी घाट, नेवादा और बेली में तमाम लोगों ने छतों पर चूल्हे जलाने शुरू कर दिए। जलस्तर लगातार बढ़ने से फिलहाल राहत के आसार नजर न आने से प्रभावित इलाकों में हड़कंप मच गया है।
विज्ञापन

3 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
बख्शीबांध-नागवासुकि से रामघाट जाने वाली सड़क पर शनिवार को नाव चलने लगी। पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। दशाश्वमेध मंदिर की पांच सीढ़ियां डूब गईं। संकट मोचन मंदिर में पानी आने के बाद मोती महल के पास बड़ा गणेश के दरबार में भी गंगा प्रवेश कर गई। इस तटीय इलाकेसे सैकड़ों परिवारों को गृहस्थी समेट कर परेड मैदान में अस्थाई ठिकाना बनाना पड़ा है। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है और लोग ट्रालियों -ठेलों के अलावा अन्य वाहनों से सामान दूसरी जगहों पर पहुंचाने में पसीना बहा रहे हैं।

4 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
तटीय बस्तियों में बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों की मदद ली जा रही है। सामान हटाने, बचाने के लिए सुबह से देर रात तक मशक्कत की जाती रही। रामघाट पर पानी भरने से अंतिम संस्कार के लिए अब चिताएं विद्युत शवदाह गृह जाने वाली सड़क की पटरियों पर लगाई जाने लगी हैं। सीडीए पेंशन भवन तक पानी आने से द्रोपदी घाट से लगी बस्तियों में संकट बढ़ता जा रहा है। यहां देर शाम तक दो दर्जन से अधिक और भवनों में पानी भर गया। बेली कछार, नेवादा, सलोरी, चांदपुर, छोटा बाघाड़ा, बख्शी बांध समेत अन्य तटीय बस्तियों में बाढ़ की मुसीबत से लोगों की नींद उड़ गई है।
विज्ञापन

5 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
बाढ़ देखने के लिए भीड़, सेल्फी लेने की होड़
प्रयागराज। नागवासुकि मंदिर जाने वाली सड़क पर नाव चलने से शनिवार की दोपहर बाढ़ देखने के लिए लोगों की भीड़ पहुंचती रही। एक तरफ तटीय बस्तियों में मुसीबत बढ़ती रही, दूसरी ओर नागवासुुकि की जलमग्न सड़क पर लोगों में सेल्फी लेने की होड़ मची रही। बाढ़ के पानी के साथ सेल्फी लेने के लिए कॉलेजों के छात्र-छात्राएं और महिलाओं की की भीड़ शाम तक लगी रही।
विज्ञापन

6 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
बाढ़ से घिरे मकान की गृहस्वामिनी की मौत
प्रयागराज। कर्नलगंज के छोटा बघाड़ा में रहने वाली 55 वर्षीय फूला देवी की शनिवार को ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई। चर्चा रही कि सुबह उनका मकान बाढ़ की चपेट में आने के बाद ही उनकी तबियत बिगड़ी थी जिसके बाद उन्हें कचहरी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। 
छोटा बघाड़ा निवासी लालचंद यादव मुंबई में रहकर प्राइवेट काम करते हैं। उनका छोटा बघाड़ा में मकान है जहां वह पत्नी फूला देवी के साथ रहते थे। इस मकान के ऊपरी दो तलों पर उन्होंने र्कई कमरे बनवा रखे हैं जिसमेें छात्र किराये पर रहते हैं। पिछले तीन दिनों से गंगा में पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही बघाड़ा में भी कई मकान पानी की जद में आ गए थे।

शनिवार सुबह उनका मकान भी पानी से घिर गया। इस दौरान नहाने जा रही फूला देवी अचानक गिरकर बेसुध हो गई। घरवाले उन्हेें लेकर म्योर रोड स्थित एक अस्पताल पहुंचे जहां इलाज के दौरान कुछ घंटे बाद उनकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था। जिसके बाद परिवारवाले शव लेकर मूल निवास जंघई चले गए। मोहल्ले में चर्चा रही कि अपना मकान बाढ़ से घिरा देखने के बाद ही फूला देवी की तबियत बिगड़ी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस का कहना है कि महिला की मौत ब्रेन हैमरेज की वजह से होने की बात सामने आई है। 
विज्ञापन

7 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
 गंगा और यमुना के जल स्तर में बढ़ोतरी का क्रम लगातार जारी है। इसकी चपेट में शहर के सैकड़ों परिवार आ गए हैं। बाढ़ चौकियों में शनिवार को पीड़ित परिवारों के पहुंचने का क्रम भी शुरू हो गया। देर रात तक छोटा बघाड़ा, गंगापुरी, राजापुर के दो दर्जन से अधिक परिवार राहत शिविर में शरण लेने के लिए मजबूर थे। शिविरों में अव्यवस्था की भी शिकायत रही। कछारी इलाके के सैकड़ों घर बाढ़ के पानी में घिर गए हैं। इसकी वजह से लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हैं। छोटा बघाड़ा स्थित एनी बेसेंट स्कूल तथा राजापुर के ऋषिकुल विद्यालय में दो दर्जन से अधिक परिवार पहुंच गए थे। एनी बेसेंट स्कूल के कमरों में तो बिजली की व्यवस्था थी लेकिन परिसर में हर तरफ अंधेरा था।

8 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
उधर, बेली कछार के घरों में भी पानी घुस गया है। धीरे-धीरे बाढ़ का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इसके मद्देनजर स्टैनली रोड स्थित महबूब अली इंटर कालेज बाढ़ चौकी को भी सक्रिय कर दिया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व मार्तंड प्रताप सिंह का कहना है कि राहत शिविरों में भोजन, सफाई, दवा आदि की व्यवस्था की गई है। भोजन के पैकेट की भी व्यवस्था की गई है।

9 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
दारागंज में चलानी पड़ी नांव
दशाश्वमेध घाट, दारागंज सब्जी मंडी तक पानी पहुंच गया है। निचले इलाके के सैकड़ों परिवार भी इसकी चपेट में आ गए हैं। ऐसे में लोगों के आवागमन के लिए दारागंज में दो नावें चलाई गई हैं। बदरा सोनैटी में भी सड़क पर पानी आ जाने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। वहां चार नावें लगाई गई हैं। एसडीएम सदर गौरव रंजन ने बताया कि जरूरत पड़ने पर अन्य स्थानों पर भी नावें भेजी जाएंगी।
विज्ञापन

10 of 10
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
बाढ़ चौकियों, कंट्रोल रूम में कर सकते हैं संपर्क
जिले में स्थापित सभी 97 बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। बाढ़ से प्रभावित चौकियों को 24 घंटे एलर्ट पर रखा गया है। किसी तरह की दिक्कत पर लोग इन चौकियों पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0532-2641577 और 0532-2641578 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंट्रोल रूम से बाढ़ की बाबत जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। प्रशासन, स्वास्थ्य, बिजली, गंगा प्रदूषण, विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम बनाई गई हैं। कंट्रोल रूम में अलग-अलग शिफ्ट में 24 घंटे टीम मौजूद रहेगी। करेली में एनडीआरएफ तथा संगम पर जल पुलिस की टीम ने कैंप लगा रखा है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित हर क्षेत्र पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। सभी विभागों को एलर्ट किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें