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Agra Suicide Case: दिल झकझोर देगी पति-पत्नी और बेटी की आत्महत्या के पीछे की कहानी, 15 दिन से थी तैयारी

Thu, 07 Jul 2022 09:52 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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सामूहिक आत्महत्या का मामला - फोटो : अमर उजाला
आगरा की आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले सोनू ने पत्नी और बेटी के साथ सामूहिक आत्महत्या का फैसला यूं ही नहीं लिया था। 14 साल पहले उसने गीता से प्रेम विवाह किया था। पति-पत्नी के बीच रिश्ते हमेशा मधुर रहे। कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ। सुसाइड नोट में भी लिखा है कि वह साथ मरना चाहते हैं। सहमति से उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। बुधवार की सुबह पति-पत्नी और नौ साल की बेटी के शव कमरे में फंदे से लटके मिले। इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया। 

15 दिन से थी सुसाइड तैयारी

मृतक सोनू की मां कांता देवी ने बताया कि बच्चे ऊपर से नीचे आते थे, लेकिन सोनू नहीं आता था। सोनू सप्ताह में एक बार आकर बाहर घूमकर चला जाता था। गीता 15 दिन से नहीं आ रही थी। वह कमर दर्द की बात कर रही थी। उसे दवा भी दी, लेकिन वह भूतल पर नहीं आई। वह सीढ़ियां नहीं चढ़ पाती हैं, इस कारण उसे देखने नहीं जा पा रही थीं। छोटी बहू से ही हालचाल पूछ लेती थीं। पुलिस अब यही मान रही है कि पति-पत्नी 15 दिन से सुसाइड की तैयारी कर रहे थे।
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बेटे-बहू और नातिन की मौत पर बिलखती मां - फोटो : अमर उजाला
मां कांता ने बताया कि बेटा सोनू 14 साल पहले सेक्टर-12 की रहने वाली गीता को लेकर चला गया था। उसके साथ प्रेम विवाह कर लिया था। हरिद्वार में ऑक्सीजन सिलिंडर बनाने की फैक्टरी में काम करने लगा। वहां किराये पर रहता था। सब कुछ अच्छे से चल रहा था। गीता और सोनू के बीच कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ। वह एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।
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सोनू का बेटा और उसकी मां - फोटो : अमर उजाला

पीपल के पेड़ पर मालिक ने डलवाया था तेजाब

मां कांता देवी ने बताया कि आठ साल पहले बेटा हरिद्वार में एक मकान में किराये पर रहता था। उस मकान में पीपल का पेड़ लगा था। मकान मालिक ने सोनू से कहा था कि वह पेड़ पर तेजाब डाल दे। सोनू ने ऐसा ही कर दिया। तब से ही परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए। उसका फैक्टरी में एक्सीडेंट हो गया। उसके कंधे की हड्डी टूट गई। वह वजन नहीं उठा पा रहा था।

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सामूहिक आत्महत्या का मामला - फोटो : अमर उजाला
कई दिन बाद भी ठीक नहीं होने पर सोनू को आगरा बुला लिया गया। उसे खंदारी में किराये के मकान में रखा। हादसे से उसके दिमाग पर बुरा असर पड़ा था। सोनू अजीबो-गरीब बातें करता था। कभी खुद तो कभी दूसरों का मारने की बात करता था। डॉक्टर के इलाज से ठीक नहीं होने पर तंत्र-मंत्र का सहारा लिया। वो एक परछाई दिखने की बात कहता था। झाड़-फूंक कराने ले जाने पर वह लड़ने लगता था। इस कारण वो भी बंद कर दिया।
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सोनू के कमरे में छानबीन करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

बेटे के लिए बनवाया था कमरा

कांता देवी ने बताया कि खर्च नहीं चलने पर बेटे को अपने मकान में बुला लिया। उसके लिए दूसरी मंजिल पर एक कमरा बनवा दिया था। इसमें टीनशेड डलवा दी थी। इसमें ही सोनू रहा करता था। पिता ही सोनू का खर्च उठाते थे। सास-ससुर के लिए खाना गीता बनाती थी। उसे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। घर में जो भी आता था, पहले सोनू और उसके बच्चों को दिया जाता था।
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सोनू के कमरे में पड़ी बच्चों की कॉपी किताबें - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन में छूट गई थी बच्चों की पढ़ाई

सोनू के बेरोजगार होने की वजह से सृष्टि और श्याम की पढ़ाई का खर्च रणधीर शर्मा उठा रहे थे। वह घर के पास ही निजी स्कूल में पढ़ते थे। सृष्टि कक्षा दो में थी, जबकि श्याम यूकेजी पास करके कक्षा एक में आया था। मगर, दो साल पहले लॉकडाउन में रणधीर का काम भी बंद हो गया। इस कारण परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। लॉकडाउन खुलने पर भी वो बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर सके। इस कारण दोनों की पढ़ाई छूट गई। दंपती ने इस साल दोनों की पढ़ाई शुरू कराने का फैसला लिया था। इसके लिए सृष्टि को ट्यूशन पढ़ने भी भेजते थे। श्याम का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, इस कारण वह दादा के साथ दुकान पर चला जाता था।
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जमीन पर पड़े शव, जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सीओ हरीपर्वत सत्यनरायण ने बताया कि घर से जो सुसाइड नोट मिला है। वह ससुर रणधीर को संबोधित किया गया है। उस पर एक अंगूठा लगा है। इसके नीचे गीता लिखा हुआ है। सुसाइड नोट में लिखा है कि जब से हम आगरा आए हैं, तब से आपके ऊपर बोझ बन गए हैं। आप मेरा खर्चा कब तक उठाओगे। आज के जमाने में आदमी अपने खर्च तक नहीं उठा सकता, दूसरों का क्या उठाएगा। फिर भी आपने बहुत कुछ किया। कब तक यूं ही खाते रहेंगे।
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