कौन सा हुनर किसके अंदर छिपा है यह तब तक पता नहीं चल पाता, जब तक किसी पारखी की नजर न पड़े। आगरा के स्वामीबाग की रहने वाली 18 वर्षीय स्वाति शुक्ला के बारे में ऐसा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। 10 वर्ष की उम्र में स्वाति शुक्ला ने चार फीट ऊपर रखे गिलास को एक लात से हवा में उड़ा दिया। बेटी की प्रतिभा को ऑटो चालक पिता अनिल शुक्ला ने परखा। अनिल ने बेटी के लिए रात में भी ऑटो चलाना शुरू कर दिया। ताइक्वांडो खिलाड़ी स्वाति शुक्ला सितंबर के अंतिम सप्ताह में नेपाल के काठमांडू में होने वाली अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में खेलेंगी।
राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी स्वाति के पिता अनिल बताते हैं कि अगले दिन मैं बेटी को एकेडमी ले गया। बेटी का खेल आर्थिक तंगी के कारण कभी रुक नहीं सके, इसलिए रात में भी ऑटो चलाना शुरू कर दिया। बेटी की खातिर हर रोज 15 घंटे ऑटो चलाता हूं। मुझे इस बात की खुशी होती है कि स्वाति ने भी मेरे सपनों को साकार करना शुरू कर दिया है। अभी तक के करियर में जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के दस पदक मुझे स्वाति दे चुकी है।