आगरा जीवनी मंडी स्थित जल संस्थान गेट के बाहर से गुजर रहे नाले का रिकॉर्ड देखा गया तो यह नहर निकली। आज जो 20 फुट का नाला है, वहां कभी 210 फुट चौड़ी नहर थी, जिसमें पानी के छोटे जहाज भी चलते थे। भूमाफिया इस पर कब्जा करते रहे, अधिकारियों ने ध्यान दिया नहीं। इस तरह नहर धीरे-धीरे नाला बन गई। मौके पर बहुमंजिला आस्था सिटी समेत सैकड़ों पक्के निर्माण मिले। टीम ने जीवनी मंडी से सुल्तानगंज पुलिया तक करीब 2.10 किमी तक नहर भूमि का सर्वे किया।
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जोंस मिल की जगह
- फोटो : अमर उजाला
जोंस मिल मामले में गुरुवार को प्रशासन की टीम जांच के लिए पहुंची थी। सिकंदरा, दयालबाग, भगवान टॉकीज से सुल्तानगंज की पुलिया होकर वाटरवर्क्स गेट से यमुना में गिरने वाली 8.50 किमी लंबी और 210 फुट चौड़ी घटवासन नहर अवैध निर्माणों में दफन हो गई। डीएम के आदेश पर जोंस मिल जमीन की जांच कर रही कमेटी के इस खुलासे के बाद अब नहर की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कवायद शुरू हो गई है।
सदर तहसील के क्षेत्रीय लेखपाल सजल कुमार, सुरजन सिंह और नगर निगम के राजस्व निरीक्षक गौरव यादव, विनय तिवारी व सिंचाई विभाग के अवर अभियंता ने टीम के साथ जोंस मिल के खसरा 2078 से नहर की पैमाइश शुरू की।
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जोंस मिल में पड़ा मलबा
- फोटो : अमर उजाला
जाली दस्तावेज से बेची नहर की जमीन
आबादी क्षेत्र में नहर भूमि नगर निगम को दी गई है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में स्वामित्व सिंचाई विभाग के नाम है। अधिशासी अभियंता सौरभ गिरी ने बताया कूटरचित दस्तावेज से कई जगह नहर भूमि की बिक्री हो गई। इसकी जांच कराई जा रही है। इन्हें चिह्नित किया जा रहा है। जमीन को मुक्त कराया जाएगा।
भूमाफिया की सूची तैयार हो रही
घटवासन स्थित जोंस मिल में भूमाफिया ने नहर की भूमि बेचकर करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। डीएम के आदेश पर जांच कर रही कमेटी अब इन भूमाफिया की सूची तैयार कर रही है। इनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।