चंबल में आई बाढ़ से पिनाहट में 20 गांव पानी में डूब गए हैं। 25 हजार से अधिक आबादी प्रभावित है। पशु लापता हो गए हैं। झोपड़ियां पानी में बह रही हैं। दो लोगों की जान पीएसी ने बचाई है। 38 से अधिक गांव में खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को डीएम प्रभु एन सिंह, एसएसपी मुनिराज और क्षेत्रीय विधायक पक्षालिका सिंह ने आपदा बचाव दल के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। राहत व बचाव कार्य शुरू कराए हैं। सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित मऊ की मढ़ैया, रानीपुरा और भटपुरा, गढ़ा आदि 10 गांव खाली कराए जा रहे हैं। निचले इलाकों से लोगों को ऊंचे स्थानों पर भेजा जा रहा है। वहीं उनके लिए अस्थाई टैंट लगाए हैं। 20 से अधिक गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। पिछले 24 घंटे में दो मीटर जलस्तर बढ़ा है।
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चंबल नदी का जलस्तर देखते डीएम
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को चंबल 134 मीटर पर बह रही थी, जो गुरुवार को बढ़कर 135.80 मीटर पहुंच गई। खतरे के निशान से छह मीटर ऊपर बह रही चंबल से तटीय 38 गांवों प्रभावित हैं। स्कूल, पंचायत घर, झोपड़ियां व खेत-खलिहान जलमग्न हैं। नुकसान का आंकलन शुरू नहीं हो सका है। डीएम प्रभु एन सिंह का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन सामिग्री, दवाईयां वितरित कराई जा रही हैं। आपदा प्रबंधन दलों मदद में जुटे हैं। उन्होंने कहा, चंबल का जलस्तर स्थिर है। अगले 24 घंटे में जलस्तर बढ़ने के आसार नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है।
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पिनाहट में जायजा लेने पहुंचे अधिकारी व जनप्रतिनिधि
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पीएसी ने बचाई दो जानें
चंबल के उफान से मलहन टूला और बावन टूला गांव में छह फीट तक पानी भर गया है। यहां मूलचंद और नवल सिंह पानी में फंस गए। पीएसी बचाव दल ने स्टीमर की मदद से दोनों ग्रामीणों की जान बचाई है। उन्हें पानी से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। बनाई 10 बाढ़ चौकियां
जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मददेनजर 10 बाढ़ चौकियां स्थापित कराई हैं। जिनमें लेखपाल, कानूनगो समेत बचाव दल व स्वास्थ्य विभाग टीमों को तैनात किया है। जिन गांव में पानी भरा है उनमें दवाएं व राशन वितरण के अलावा मशीनों से संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए दवाईयों का छिड़काव कराया जा रहा है।
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चंबल नदी में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
2019 में बने थे ऐसे हालात
17 सितंबर 2019 को चंबल में ऐसे ही हालात बन गए थे। तब जलस्तर 136.10 मीटर तक पहुंच गया था। 40 से अधिक गांवों में पानी भरने से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया था। चंबल नदी में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ 1996 में आई थी। तब चंबल का जलस्तर 136.60 मीटर तक पहुंच गया था। 25 साल पहले का मंजर ग्रामीणों की आंखों में आज भी तैर रहा है।
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गांव में आया चंबल नदी का पानी
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ग्रामीणों के पशु लापता
क्योरीपुरा गांव निवासी रामरतन, सतेंद्र, राम प्रकाश और कालीचरन ने बताया कि बाढ़ में उनके पशु लापता हो गए हैं। जिनमें तीन भैंस व दो बकरियां शामिल हैं। बुधवार को लापता हुए पशुओं का कोई सुराग नहीं मिला। उधर, गोहरा, झरना पुरा, पुरा शिवालाल, पुरा डाल, उमरैठा पुरा, कछियारा, रेहा, डगोरा, भगवान पुरा आदि गांव में बाढ़ का पानी भरने से तबाही का मंजर है। नहीं मिल रही कोई मदद
एक तरफ प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत बचाव कार्यों का दावा कर रहा है, दूसरी तरफ उमरैठा पुरा निवासी राधे लाल और सुभाष ने बताया कि प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। तिरपाल ढालकर टीले पर स्वयं रहने की व्यवस्था की है।
यमुना में थमा उफान, एक फीट घटा जलस्तर
शहर में यमुना का उफान बृहस्पतिवार को थम गया है। एक फीट जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा टलता नजर आ रहा है। हांलाकि यमुना की तलहटी में बसे गांवों में खेत जलमग्न हैं। परंतु किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। प्रतापपुरा स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक वॉटर वर्क्स पर यमुना का जलस्तर बृहस्पतिवार शाम 4 बजे 491 फीट था। बुधवार को यह 492 फीट तक पहुंच गया था। पिछले 24 घंटे में एक फीट जलस्तर में गिरावट आई है। बाढ़ नियंत्रण प्रभारी उदल सिंह ने बताया कि यमुना में अब जलस्तर नहीं बढ़ेगा। लो फ्लड लेवल 495 फीट है। बृहस्पतिवार को मथुरा के गोकुल बैराज से आगरा की ओर यमुना में 32980 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उधर, ओखला बैराज से यमुना में 21222 क्यूसेक डिस्चार्ज है। हरियाणा स्थित ताजेवाला (हथिनीकुंड) बैराज से भी डिस्चार्ज घट गया है। यहां 6680 क्यूसेक डिस्चार्ज है। हाथीघाट, बल्केश्वर और कैलाश घाट पर यमुना प्रेमी कालिंदी की कलकल देख उत्साहित हैं। पहाड़ों पर बारिश से यमुना में जलस्तर बढ़ेगा। अगर बारिश नहीं होती है तो अगले दो से तीन दिन में यमुना का पानी आगे बह जाएगा। जिसके बाद हालात पूरी तरह सामान्य होंगे। एक साल में बुधवार को यमुना जलस्तर अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा था।