मथुरा: बलदेव में दाऊजी का विग्रह
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कलयुग में हरते हैं कष्ट
जनपद मुख्यालय से पूर्वी छोर पर 20 किलोमीटर दूर स्थित बलदेव नगरी में बलरामजी का श्रीविग्रह करीब आठ फीट ऊंचा, साढ़े तीन फीट चौड़ा और श्यामवर्ण है। पीछे शेष नाग सात फनों से युक्त मूर्ति की छाया करते हैं। विग्रह नृत्य मुद्रा में है। दाहिना हाथ सिर से ऊपर वरद मुद्रा में है। बाएं हाथ में चशक है। विशाल नेत्र, भुजाएं, भुजाओं में आभूषण, कलाई में कड़ूला है। मुकुट में बारीक नक्काशी है। दाऊजी पैरों में आभूषण और कमर में धोती पहने हैं। मूर्ति के कान में कुंडल, कंठ में बैजयंती माला है। मूर्ति के सिर के ऊपर के तीन बलय हैं। मान्यता है मंगला के जो दर्शन करता है, वह कभी कंगला नहीं हो सकता।