लखनऊ की इस परंपरा का मुगल काल से जुड़ाव
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लखनऊ की इस परंपरा का मुगल काल से जुड़ाव
एक कहानी के अनुसार नवाब वाजिद अली शाह के पुत्र की तबीयत अत्यधिक खराब हो गई थी। किसी उपाय से लाभ न मिलने पर उन्हें अलीगंज स्थित एक हनुमान मंदिर में मन्नत मानने की सलाह दी गई। वहां प्रार्थना करने के बाद उनके पुत्र की तबीयत में सुधारने लगी। इसके उपरांत नवाब और उनकी बेगम ने उस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जो ज्येष्ठ माह में पूर्ण हुआ। तभी से लखनऊ में बड़ा मंगल के दिन भंडारे और गुड़ के प्रसाद वितरण की परंपरा शुरू हो गई।
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