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Chandra Grahan 2021 Today: इन राशियों के जातकों के लिए रहेगा शुभ, जानिए सभी राशियों पर प्रभाव

Fri, 19 Nov 2021 11:53 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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चंद्र ग्रहण 2021 - फोटो : अमर उजाला
ग्रहण की धार्मिक मान्यता उस स्थान पर अधिक होती है, जहां पर वह दिखाई देता है। परंतु मनुष्यों, प्राणियों तथा वृक्ष-वनस्पतियों पर सौरमंडल की इस उथल-पुथल का विशेष प्रभाव जरूर पड़ता है। शुक्रवार के दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को लगने वाला खंड ग्रास चंद्र ग्रहण अल्प समय के लिए अरुणाचल प्रदेश तथा असम के कुछ क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय देखा जा सकता है। शेष भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण इस खंड ग्रास चंद्र ग्रहण के सूतक आदि का विचार हर स्थान पर नहीं होगा, परंतु इस खगोलीय घटना का प्रभाव मन-मस्तिष्क और जड़-चेतन पर अवश्य पड़ेगा। 
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चंद्र ग्रहण 2021
जहां ग्रहण दिखे, वहीं सूतक : जहां चंद्र ग्रहण दिखाई पड़ता है, उस स्थान पर ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है। भारतीय समयानुसार कार्तिक पूर्णिमा पर ग्रहण का प्रारंभ दिन में 12 बजकर 48 मिनट, ग्रहण मध्य 02 बजकर 33 मिनट तथा ग्रहण मोक्ष सायं 04 बजकर 17 मिनट पर होगा। जिन स्थानों पर ग्रहण दिखाई पड़ेगा, वहीं पर ग्रहण के सूतक आदि का विचार किए जाने की जरूरत है, अन्य स्थानों पर नहीं। चंद्रोदय के समय भारत के सुदूर पूर्वी राज्यों, अरुणाचल प्रदेश तथा असम के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों में ग्रहण स्वल्पग्रास ग्रस्तोदय के रूप में बहुत ही कम समय के लिए दिखाई देगा। चंद्रमा ग्रस्त ही उदय होगा तथा उदय के कुछ ही मिनटों के बाद ग्रहण समाप्त हो जाएगा। 
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आशुतोष वार्ष्णेय ज्योतिषाचार्य - फोटो : अमर उजाला
विशेष उपाय : पृथ्वी पर ग्रहण चाहे जहां भी लगा हो, पूर्णिमा के दिन राशि से संबंधित वस्तुओं को नदी में प्रवाहित करने अथवा दान करने से दुर्भाग्य दूर होता है। अपनी राशि से संबंधित वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प लेना चाहिए। फिर ग्रहणकाल की अवधि के बाद इनका दान करें अथवा नदी में बहाएं।

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चंद्र ग्रहण 2021 - फोटो : iStock
साधना और सिद्धि फलदायी : ग्रहण एक खगोलीय घटना होने के साथ-साथ आध्यात्मिक साधना-सिद्धि का पर्व है। जहां ग्रहण नहीं भी दिखाई पड़ेगा, वहां भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्नान, दान, जप-पाठ, मंत्र-स्तोत्र पाठ, मंत्र सिद्धि और ध्यान आदि शुभ कृत्यों का संपादन करना कल्याणकारी है। 
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बारह राशियों पर सम्मिलित प्रभाव : पूर्णिमा तिथि, शुक्रवार का दिन, कृतिका नक्षत्र और वृष राशि में राहु और चंद्रमा, तुला राशि का मंगल और बुध, वृश्चिक राशि का सूर्य और केतु, धनु राशि का शुक्र, मकर राशि का शनि तथा कुंभ राशि के गुरु का सम्मिलित प्रभाव बारह राशियों को प्रभावित करेगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मेष राशि : भाग्योदय की संभावना विकसित होगी और रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। जल में बादाम प्रवाहित करें।
वृष राशि : इसी राशि में ग्रहण होने के कारण अज्ञात भय और अनावश्यक तनाव रहेगा। कपूर का दान अवश्य करें।
मिथुन राशि : मिश्रित प्रभाव रहेगा। खर्च की वृद्धि और वरिष्ठजनों का साथ मिलेगा। हरी वस्तुओं का दान लाभ देगा। 
कर्क राशि : स्थान परिवर्तन का योग है। अनावश्यक वाद-विवाद से बचें। सांयकाल में सफेद बताशा दान करें। 
सिंह राशि : कार्यक्षेत्र प्रभावित होगा। असंतुलन से बचने के लिए तांबे के सिक्के को जल में प्रवाहित करें। 
कन्या राशि : मिश्रित प्रभाव रहेगा। भाग्य के सहयोग हेतु पूर्णिमा के दिन किसी गरीब व्यक्ति की सहायता अवश्य करें। 
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तुला राशि : अनावश्यक यात्रा से बचने का प्रयास करें। इत्र का दान लाभदायक रहेगा। 
वृश्चिक राशि : जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। संघर्ष के साथ सफलता का योग बन रहा है। गाय को गुड़ अवश्य खिलाएं। 
धनु राशि : शत्रु निर्बल रहेंगे। घर में मांगलिक कार्यों का आयोजन होगा। धार्मिक वस्तुओं का दान अवश्य करें।
मकर राशि : बुद्धि भ्रम का योग बन रहा है। शेयर बाजार आदि में निवेश से बचें। तेल का दान अवश्य करें। 
कुंभ राशि : बिना किसी कारण के चिंता तथा तनाव से गुजरना पड़ेगा। गरीब व्यक्ति की मदद भाग्योदय में सहायक है।
मीन राशि : यात्रा से लाभ होगा। बड़ों का सहयोग सफलता दिलाएगा। केसर अथवा हल्दी का दान श्रेयस्कर है।
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