पर्वतारोही बनने का सफर
आर्थिक तंगी के बीच बछेंद्री पाल ने मैट्रिक पास किया और फिर स्नातक किया। वह अपने गांव में ग्रेजुएशन करने वाली पहली महिला थीं। स्नातक की डिग्री लेने के बाद बछेंद्री ने संस्कृत से परास्नातक किया। फिर बीएड किया। उनका सपना पर्वतारोही बनने का था, हालांकि उनके परिवार यह नहीं चाहता था। इसके बावजूद बछेंद्री पाल ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला लिया।
बछेंद्री पाल की उपलब्धि
साल 1984 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए अभियान दल का गठन हुआ। इस दल का नाम एवरेस्ट 84 था, जिसमें बछेंद्री पाल भी शामिल थीं। उनके साथ दल में 11 पुरुष और पांच महिलाएं थीं। कड़ी ट्रेनिंग के बाद उसी साल मई में उनका दल अभियान के लिए निकला। खराब मौसम, तूफान और कठिन चढ़ाई का सामना करते हुए 23 मई 1984 के दिन बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर फतह करते हुए इतिहास रच दिया।