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Rajasthan: 550 साल में पहली बार इस गांव में निकली दलित दूल्हे की बिंदौली, राजपुरोहित समाज ने इसलिए बदली परंपरा 

Mon, 13 Jun 2022 06:47 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली

सार

550 साल में पहली बार इस गांव में निकली दलित दूल्हे की बिंदौली  
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राजपुरोहित समाज ने किया बिंदौली का स्वागत। - फोटो : सोशल मीडिया
राजस्थान में दलित दूल्हों की बिंदौली रोकना, उनसे मारपीट करना या फिर पुलिस के पहरे में बिंदौली निकले की खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं। लेकिन, प्रदेश के पाली जिले में रविवार को जो हुआ उसने कई लोगों के चहरे पर खुशी ला दी। जिले के निम्बाड़ा गांव में राजपुरोहित समाज के लोगों ने सैकड़ों साल पुरानी प्रथा का खत्म कर एक नई पहल शुरू की। जिसके तहत अब दलित दूल्हों की बिंदौली भी निकाली जा सकेगी। 
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सभी जाति के लोग हुए शामिल। - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, पाली का निम्बाड़ा गांव राजपुरोहित बहुल्य हैं। बीते 550 साल में गांव में एक भी दलित दूल्हे की बिंदौली घोड़ी पर नहीं निकली। इस कारण गांव के दलित युवाओं की घोड़ी पर बिंदौली निकालने की इच्छा कभी पूरी नहीं सकी, लेकिन अब गांव में कोई भी दलित दूल्हा घोड़ी पर बिंदौली निकाल सकता है। 
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गांव में बैठक कर लिया फैसला। - फोटो : सोशल मीडिया
राजपुरोहित समाज के लोगों ने आपसी सौहार्द बढ़ाने के लिए रविवार को एक बैठक बुलाई। जिसमें सभी जाति के लोग शामिल हुए। इस दौरान राजपुरोहित समजा के प्रमुख लोगों ने कहा, सभी चाहते हैं कि अब गांव में दलित दूल्हों की भी बिंदौली निकले। इस दौरान किसी तरह का तनाव नहीं होना चाहिए। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस बात का समर्थन किया। गांव वालों ने गुड़ा एंदला एसएचओ रविन्द्रपाल सिंह राजपुरोहित को भी बुलाया और उन्हें बैठक में हुए फैसले की जानकारी दी।  
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राजस्थान के कई शहरों में इस तरह पुलिस के साए में दलित दूल्हों की बिंदौली निकलती है। निम्बाड़ा गांव के राजपुरोहित समाज ने इस कुप्रथा का अंत कर दिया है। सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
बैठक के बाद शाम को गांव में पहली बिंदौली मेघवाल समाज के उत्तम कटारिया की निकली। इस दौरान राजपुरोहित समाज के लोगों ने दूल्हे को माला पहनाई, पान खिलाया और नेग देकर बिंदौली को रवाना किया। इसके अलावा अन्य जाति के लोग भी बिंदौली में शामिल हुए। 550 साल बाद इस तरह का सकारात्मक बदलाव ने कई लोगों के चहरे पर खुशी ला दी है।
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