सौमित्र त्रिपाठी
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सौमित्र बताते हैं कि जब वह दस साल के थे तो चारबाग स्टेशन पर कैप्टन मनोज पांडेय से उनकी मुलाकात हुई, जिनसे उन्होंने सेना में भर्ती होने के बारे में जानकारी ली। जिस पर उन्हें शहीद पुनीत नाथ दत्त के बारे में बताया और कहा कि हमारी शहादत को लोग भूल जाते हैं। परिजनों का ख्याल नहीं रखते, जिसके बाद उन्होंने शहीद परिजनों के लिए काम करने की मन में ठान ली।