जेठ माह के बड़े मंगल पर लखनऊ में भंडारे की परंपरा दशकों पुरानी है। अलीगंज के नए-पुराने हनुमान मंदिर से इसका बहुत गहरा नाता है। कहते हैं नवाबी दौर में इन्हीं दोनों मंदिरों से बड़े मंगल पर मेला और भंडारे की प्रथा की शुरुआत हुई। जानकार बताते हैं कि गोमती के उस पार जो आजकल मडि़यांव के नाम से जाना जाता है, शीशम, नीम, पीपल, आम और पाकर के वृक्षों से खूब हरा-भरा था। बीच-बीच में छोटे-छोटे तालाब थे, जिनमें कमल खिला करते थे। इसी जगह पर बसाए गए चांदगंज में कई कच्चे तालाब मिले। इसी इलाके के पास ही अलीगंज आबाद हुआ, जिसे नवाब आसिफुद्दौला की मां, बहू और बेगम ने बसाया। यहीं पर रामभक्त हनुमान के दो प्राचीन मंदिर हैं। इस मंदिर के बारे में कुछ इतिहासकारों से बात करके हमने तैयार की खास रिपोर्ट...।