मधुमेह से डरने की जरूरत नहीं है। अपनी जीवनशैली बदलकर कोई भी इस बीमार से लड़ सकता है। मधुमेह का असर आंख के साथ दांत पर भी दिखता है। सुबह करीब 30 मिनट टहलने, मीठी चीजें और वसायुक्त खानपान से परहेज करने से काफी फायदा होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
डायबिटीज से डरें नहीं बल्कि अपनी जीवनशैली बदलेंहल्का भोजन करने से भी मधुमेह में काबू में रहता है। 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस से दो दिन पहले डॉक्टरों ने बातचीत के दौरान एक्सरसाइज और खानपान सुधारने पर जोर दिया। आप भी जानिए किन बातों का रखना है ध्यान...
मधुमेह से डरें नहीं बल्कि अपनी जीवनशैली को बदलें
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डॉ डी हिमांशु, केजीएमयू
- फोटो : अमर उजाला
शुगर की वजह से भी होता है दांतों में दर्द
मधुमेह के सामान्य लक्षणों में वजन का अचानक कम होने लगना, बार-बार पेशाब आना, भूख ज्यादा लगना, बार-बार इंफेक्शन होना, पैरों में झनझनाहट, जोड़ों में ंदर्द, कंधे में दर्द, कमर व पेढ़ू का अचानक बढ़ना शामिल हैं। दो साल पहले केजीएमयू में हुए शोध में यह बात भी सामने आई कि जिन मरीजों के दांत हिलते हैं, कटकटाने या झनझनाहट होती है, उनमें भी शुगर की अधिकता रहती है। 35 से 40 साल की उम्र होने पर हर छह माह में एक बार शुगर की जांच अनिवार्य रूप से करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सामान्य व्यक्ति की फास्टिंग शुगर लेवल 80 से 100 और पीपी 140 से नीचे रहे तो मधुमेह नियंत्रित माना जाता है। शुगर बढ़ा हुआ है तो कम से 30 मिनट तेेज गति से चलने की आदत डालें। - डॉ. डी हिमांशु, केजीएमयू
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डॉ विक्रम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
दवा से ज्यादा एक्सरसाइज पर दें ध्यान
मधुमेह में दवा से ज्यादा एक्सरसाइज और अपनी लाइफस्टाइल दुरुस्त रखने की जरूरत होती है। देर रात तक जागना और खाली पेट रहना भी शुगर को बढ़ाता है। इसके असर को कम करने के लिए सुबह तेज गति से चलना चाहिए। टहलते वक्त गति इतनी तेज हो कि हार्ट बीट बढ़े और शरीर से पसीने छूटें। सुबह का नाश्ता ज्यादा लें और शाम का भोजन कम कर दें। - डॉ. विक्रम सिंह, लोहिया संस्थान
साइकिल चलाने से भी काबू में रहती है बीमारी
जो लोग साइकिल चलाते हैं, उनमें शुगर बढ़ने की आशंका न के बराबर होती है। इसलिए शुगर से बचने या इसे नियंत्रित रखने के लिए साइकिल जरूर चलाना चाहिए। सुबह-शाम कुछ देर टहलने और कुछ देर साइकिल चलाने से यह नियंत्रित हो जाती है। पेट को खाली नहीं रखना चाहिए। थोड़ी-थोड़ी देर पर कुछ खाते रहना चाहिए। तली-भुनी और बाजार की चीजों का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए। - डॉ. अनिल गंगवार, एसजीपीजीआई