अस्पताल में तोड़फोड़ के बाद का हाल
- फोटो : amarujala
इस बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की गई। यहां दोनों पक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मारपीट-तोड़फोड़ करने वाले छह लोगों को हिरासत में ले लिया है। इसमें दो महिलाएं हैं। अस्पताल में करीब डेढ़ घंटे तक चले हंगामा व बवाल के चलते इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक सेवाएं ठप हो गईं। डॉक्टर व स्टॉफ ओपीडी छोड़कर बवाल को शांत कराने में लगे थे। इस दौरान यहां आए मरीज व तीमारदार डॉक्टर के इंतजार में पड़े तड़पते रहे। मरीजों का कहना है कि दोपहर करीब एक बजे बाद डॉक्टर दोबारा ओपीडी में वापस आए। इसके बाद मरीजों का इलाज शुरू हो सका।
अस्पताल में पूर्व में तैनात एक स्थाई वार्ड ब्वॉय पर महिला मरीज ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इसे लेकर वहां पर हंगामा हुआ था। अफसर इस मामले को निपटा गए थे। वहीं आरोपी वार्ड ब्वाय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।अस्पताल में घुसकर डॉक्टर व स्टॉफ से मारपीट करने वालों पर कार्रवाई न होने से डॉक्टरों में काफी रोष है। डॉक्टरों का कहना है कि आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई न हुई तो वह इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर कार्य बाधित कर सकते हैं। 181 आशा ज्योति केंद्र की प्रभारी अर्चना ने बताया कि पीड़िता ने घटना की शिकायत की तो हमारी टीम की सदस्य श्वेता, संघमित्रा व दीपिका मौके पर पहुंचीं। वहां एसओ ने अभद्रता की। बाद में इसकी शिकायत एसपीआरए से की गई तब उनके दखल पर मामला शांत हुआ।
अस्पताल में तोड़ फोड़ के बाद का हाल
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युवती के आरोप गलत हैं। वह ओपीडी में आई थी, उसको स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास रेफर कर किया था। वह अल्ट्रासाउंड लिखने के लिए बोल रही थी, मना करने पर वो विवाद करने लगी। इसके बाद उसने अपने परिवारीजनों को बुलाकर हंगामा, मारपीट व तोड़फोड़ किया। - डॉ. वीरेंद्र कुमार , आयुष मेडिकल अफसर, रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल