फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुलजार की 10 नज्में जो मोहब्बत और जिंदगी करेगी 'गुलजार'

Sun, 18 Aug 2019 07:55 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
Gulzar - फोटो : अमर उजाला
एक शख्स जिसमें निर्देशन, गीत, लेखन, नज्म और गजल समाएं हो उसे गुलजार कहते हैं। शब्दों के जादुगर गुलजार साहब का जन्मदिन 18 अगस्त को होता है। उनके द्वारा लिखी नज्मे बच्चों से लेकर बड़ो के दिल में बसी हैं। आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी लिखी हुई कुछ चुनिंदा पंक्तियां बताने जा रहे हैं, जिनकी गहराइयों में प्यार और जिंदगी का असल मतलब छिपा है...
विज्ञापन

2 of 7
गुलजार
उड़ के जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलाती रही वह शाख़ फ़िज़ा में 
अलविदा कहने को? या पास बुलाने के लिए?
विज्ञापन

3 of 7
gulzar
-आइना देख कर तसल्ली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई
-सुनो.... जरा रास्ता तो बताना, मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी

4 of 7
gulzar
-हम ने देखी है इन आंखों की महकती खुशबू, हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्जाम ना दो, सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो, प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
विज्ञापन

5 of 7
gulzar
-एक बार वक्त से, लम्हा गिरा कही, वहा दास्तां मिली, लम्हा कही नहीं, थोड़ा सा हंसा के, थोड़ा सा रुला के, पल ये भी जानेवाला है
विज्ञापन

6 of 7
gulzar
-हमने सपना देखा है कोई अपना देखा है, जब रात का घूंघट उतरेगा और दिन की डोली गुजरेगी, तब सपना पूरा होगा, थोड़ा है थोड़े की जरूरत है, जिंदगी फिर भी यहां खूबसूरत है
-कहीं किसी रोज यूं भी होता, हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके, वो रात तुमने गुजारी होती
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
गुलज़ार
-वो यार है जो खुशबू की तरह, वो जिंदगी जुबां उर्दू की तरह, वो जिसकी जुबां उर्दू की तरह, मेरी शाम रात, मेरी कायनात, वो यार मेरा सईंया-सईंया
-क्या पता कब कहाँ मारेगी? बस कि मैं जिंदगी से डरता हूँ, मौत का क्या है, एक बार मारेगी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें