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अमर उजाला विशेष: देश के वरिष्ठ डॉक्टरों से जानिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा साल 2021, आगे के लिए क्या है सलाह?

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डॉक्टरों का साल 2021 का अनुभव - फोटो : amarujala
कोरोना महामारी और सेहत के लिए तमाम चुनौतियों से भरे साल 2021 को 'टाटा बाय-बाय' बोलकर अब हम नए साल 2022 में प्रवेश करने जा रहे हैं। सकारात्मक सोच और इस विश्वास के साथ, कि आने वाला साल हम सभी के लिए सेहतमंद और खुशियों से भरा हुआ रहेगा। नए साल में हम वैश्विक महामारी कोरोना को मात देकर भविष्य के लिए बेहतर और सेहतमंद समाज की उम्मीद कर सकेंगे। पर नए साल में आगे बढ़ने से पहले हम सभी को पृथ्वी पर 'ईश्वर' का रूप कहे जाने वाले डॉक्टर्स को धन्यवाद देना चाहिए, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सीना तान कर खड़े रहते हुए आम जन की मुसीबतों को दूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

साल 2021 सेहत के लिहाजे से काफी चुनौतीपूर्ण रहा।साल की शुरुआत से ही कोरोना महामारी ने लोगों को परेशान किया, जिसने अप्रैल-मई के महीने में ऐसा विकराल रूप धारण कर लिया जिसने लाखों लोगों की जान ले ली। ऑक्सीजन की किल्लत, कोविड-19 की गंभीर जटिलताओं के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लोगों के लिए कदम-कदम पर मुश्किलें खड़ी करती रहीं। हालांकि इन सब के बीच देश के डॉक्टर्स ने बड़ी ही मुस्तैदी के साथ लोगों को इस मुसीबत से निकाला और अगस्त-सितंबर आते आते कोरोना की रफ्तार को रोकने में कामयाबी हासिल की। कोरोना के बाद ब्लैक फंगस और साल के अंत में डेंगू के मामले एक अलग तरह की चुनौती खड़ी करने वाले थे। अमर उजाला देश के सभी डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों को विपरीत परिस्थितियों में उनकी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा के लिए साधुवाद देता है। 

आइए आगे की स्लाइडों में अलग-अलग विभाग के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से उनके साल 2021 के अनुभवों के बारे में जानते हैं। इसके साथ ही यह भी जानने की कोशिश करते हैं कि साल 2022 को सेहत के नजरिए से बेहतर बनाने के लिए उनकी लोगों को क्या सलाह है?
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डॉ सत्यकांत त्रिवेदी - फोटो : Self
''मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण था साल 2021''

डॉ सत्यकांत त्रिवेदी
मनोरोग विशेषज्ञ
भोपाल, मध्य प्रदेश


साल 2021 में कोरोना संक्रमण ने सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह से प्रभावित किया। इस बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए बंसल हॉस्पिटल, भोपाल में वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, कोरोना के दौरान लोगों में डर और असमंजस्य का मौहाल देखने को मिल रहा था। इस वजह से इस साल लोगों में चिंता, तनाव, नींद की समस्या, आशंका जैसी दिक्कतें ज्यादा देखने को मिलीं। कोरोना की दूसरी लहर में अपने लोगों को खोना, समय पर इलाज न मिल पाने, वैक्सीनेशन को लेकर डर के चलते लोगों का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित रहा। यही कारण है कि इस साल मानसिक रोगियों के मामलों में 40-60 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला।
 
बतौर मनोचिकित्सक इस बार हमें लोगों को 'वास्तविकता' में लाने पर ज्यादा ध्यान देना पड़ रहा था। रोगी या तो पुराने ट्रॉमा के बारे में बात कर रहे थे या वह भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे में काउंसिलिंग के समय लोगों को करेंट सिचुऐशन में लाने के लिए हमें ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह साल हमारे लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, पर अब हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं तो हमें पिछली नकारात्मकता से ज्यादा आगे की सकारात्मकता पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

नया साल हम सब के लिए बेहतर होगा, यही कामना है। इस साल में मेंटली फिट रहने के लिए सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से ज्यादा परिवार के साथ समय बिताएं, लोगों से बातचीत करते रहें, दोस्तों-परिवार के साथ मन की बातें शेयर करें, रिश्तों को बातचीत के जरिए सुधारें और सबसे जरूरी बात अगर आपको लगता है कि कोई भी मानसिक परेशानी बढ़ रही है तो मनोचिकित्सक से संपर्क करने में हिचक न करें। ध्यान रहे, आप मानसिक तौर पर स्वस्थ रहेंगे तभी आगे बढ़ सकेंगे। नए साल की सभी को शुभकामनाएं।
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डॉ अनिल ठकवानी - फोटो : Self
''विपरीत परिस्थितियों में सफलता बहुत विश्वास देती है''

डॉ अनिल ठकवानी 
एचओडी, ऑन्कोलॉजिस्ट
ग्रेटर नोएडा


साल 2021 सेहत के लिहाजे से दुनियाभर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कोरोना के बढ़ते मामलों की गंभीरता ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए संक्रमितों की जान बचाने को प्राथमिक बना दिया, ऐसे में अन्य बीमारियों के शिकार लोगों को इलाज के लिए कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। साल 2021 कैंसर के रोगियों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस बारे में हमसे अपने अनुभव साझा करते हुए शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा में वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अनिल ठकवानी बताते हैं, कोरोना से जूझता यह साल कैंसर रोगियों के लिए काफी समस्याओं से भरा रहा। हालांकि हमने पूरी जी-जान लगाकर रोगियों के इलाज में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कोविड के समय में सर्विक्स कैंसर के तीसरे चरण की एक महिला का केस हमारे पास आया। हमारे सामने उसे कोविड से बचाते हुए उचित उपचार मुहैया कराने की चुनौती थी। कोविड के दौर में हमने डेढ़ महीने उसका इलाज किया और मुझे इस बात को बताते हुए खुशी है कि अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। ऐसी सफलताएं हमें विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने की उम्मीद देती हैं। फिलहाल अब हमें आगे की तरफ देखना है।
 
कैंसर बड़ी बीमारी है, ऐसे में अगले साल हमें इससे बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहना होगा। जीवनशैली की गलत आदतों जैसे धूम्रपान और शराब को छोड़कर, नियमित रूप से व्यायाम और पौष्टिक आहार का सेवन करके हम कई तरह के कैंसर से सुरक्षित रह सकते हैं। नए साल में उम्मीद करते हैं कि हम सभी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, आज के समय में यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

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डॉ अल्तमश शेख - फोटो : Self
''2021 चुनौतीपूर्ण था पर इसने निखरने का मौका दिया''

डा. अल्तमश शेख
(एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबेटोलॉजिस्ट)
मुंबई


कोरोना संक्रमण से प्रभावित यह साल 2021 पहले से ही कई तरह की बीमारियों से परेशान रोगियों के लिए खासा चुनौतीपूर्ण बन गया था। इसमें भी डायबिटीज रोगियों के लिए समस्याएं काफी बढ़ गई थीं। एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ अल्तमश शेख ने इस साल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए हमें बताया, साल 2021 हमारे लिए कई तरह की मुश्किलों से भरा हुआ रहा। कोरोना के दौर में डायबिटीज के रोगियों की संख्याऔर उनकी जटिलताएं बढ़ती जा रही थीं। हमारे पास डबल चैलेंज था, पहला- डायबिटीज के रोगियों को कोरोना संक्रमण से बचाना और दूसरा उनका सही से समय पर उपचार सुनिश्चित करना। कोविड इंड्यूज डायबिटीज से निपटना और लोगों की जान बचाना हमारे लिए बड़ा चैलेंज था। ओवरऑल हम एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरे, हालांकि इस दौर ने हमें बतौर डॉक्टर और निखरने का मौका दिया।
 
डॉ शेख कहते हैं- रोगियों को ऐसे विपरीत हालात में ठीक करके वापस घर भेजना हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी और सबसे बड़ी कामयाबी रही। साल 2021 के खत्म होते होते एंटीबॉडी कॉकटेल रेजिमेंट के हमें बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। इसके अलावा अब ज्यादातर लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है तो हम कोरोना के खतरे से खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित मानकर चल रहे हैं, हालांकि ओमिक्रॉन अब भी रास्ते का बड़ा पत्थर है।
 
साल 2022 हम सभी के लिए सेहतमंद रहे, सभी स्वस्थ रहें यही कामना है। हालांकि जिस तरह से अभी ओमिक्रॉन हम सबके लिए नई मुसीबत बनकर उभरा है उससे बचाव के लिए हमें लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए। डायबिटीज से बचाव के उपाय, उचित आहार, नियमित व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर हम एक स्वस्थ भविष्य की कामना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। 
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डॉ विधि.एम.पिलानिया - फोटो : Self
''साल 2021 ने विपरीत परिस्थितियों में मजबूत बनना सिखाया''

डॉ विधि.एम.पिलानिया
मनोचिकित्सक (पीएचडी एम्स दिल्ली) 
फैकल्टी 
बीएसएफ

कोरोना संक्रमण के इस दौर में तमाम तरह की चुनौतियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य के मामले भी लोगों के लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बने रहे। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ विधि बताती हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है कि साल 2021 मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि हमें नकारात्मकता से ज्यादा सकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचने और उनपर चर्चा करने की आवश्यकता है। कई तरह की सामाजिक और भावनात्मक समस्याओं के कारण लोगों के लिए मुश्किलें जरूर रहीं लेकिन खास बात यह है कि इस साल ने हमें यह भी सिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में हमें खुद को मजबूत करना है? इस साल से हमने सीखा कि रिश्ते और छोटी-छोटी खुशियां हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं?
 
हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं, कहते हैं किसी नए चीज की शुरुआत सकारात्मकता के साथ की जाए तो वह अधिक फलित होता है, साल 2022 में हम इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे कि 'अब सब बेहतर होगा'।

इस साल हमें समय को कैसे मैनेज करना है, इस बारे में ज्यादा गंभीरता से सोचने की जरूरत है, क्योंकि अगर आपको पता है कि कौन सा समय किस चीज को देना है तो यकीन मानिए सारी मुश्किलें बहुत आसानी से दूर हो जाएंगी। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए पर्याप्त नींद, उचित आहार, नियमित व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाएं, यह मानसिक और शारीरिक दोनों  स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। खुश रहना सीखिए, संतुष्ट रहना सीखिए, रिश्तों को महत्व दीजिए, यकीनन इस साल सब कुछ बेहतर होगा, पहले से कहीं ज्यादा बेहतर।
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डॉ कमल बी कपूर - फोटो : Self
''साल 2021 अलग अनुभवों वाला साल था, यह हमेशा याद रहेगा''

डॉ कमल बी कपूर
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ
नई दिल्ली


साल 2021 में आंखों की सेहत का ख्याल रखना भी लोगों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। ब्लैक फंगस जैसे संक्रमण के चलते कई लोगों को आंखों की रोशनी तक गंवानी पड़ गई। 2021 में आंखों से संबंधित समस्याओं के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए शार्प साइट आई हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ कमल बी कपूर बताते हैं, कोरोना महामारी से जूझता साल 2021 सभी के लिए काफी चैलेंजिंग रहा। कोरोना के समय में आंखों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे थे, वहीं ब्लैक फंगस से निपटने के लिए शुरुआत में हमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि समय के साथ-साथ स्थितियों को कैसे प्रबंधित करना है, इस बारे में हमने सीखा, काम किया और सफल भी हुए। 
 
एक सर्वेक्षण के मुताबिक साल 2020-21 में अनुमानित 27 करोड़ लोगों ने अपने आंखों की रोशनी गवां दी। आने वाले साल में हमें आंखों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। कोविड-19 की गंभीरता का असर लोगों की आंखों के लिए भी मुसीबतों का कारण बना। कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों ने भी आंखों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाला। इसके अलावा अधिकांश ग्रामीण समुदायों में आंखों के स्वास्थ्य को लेकर लोगों को कोरोना के दौर में तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन समस्याओं को कम करने के लिए हमारी टीम ने भी प्रयास किए और सफलता भी मिली। 

नए साल में हम नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आंखों की सेहत को लेकर हमें इस साल और अलर्ट रहना होगा, किसी भी तरह की लापरवाही से बचकर, हमें ईश्वर के इस अमूल्य उपहार को सुरक्षित रखने के प्रयास करते रहने होंगे। सभी देशवासियों के लिए नया साल मंगलमय हो, यही कामना है।
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डॉ वसीम गौहरी - फोटो : Self
''डर और अनिश्चितता के माहौल में हम स्वास्थ्यकर्मी निरंतर डटे रहे''

डॉ वसीम गौहरी
डायबिटर्स मंच पर भारत के प्रतिनिधि


साल 2021 कई मायनों में 2020 की ही तरह परीक्षा लेता रहा। कोरोना महामारी ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया। इस साल के बारे में अपने अनुभवों को साझा करते हुए वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ वसीम बताते हैं, सेहत के लिहाजे से साल 2021 कई तरह की विषम परिस्थितियों वाला था। साल की शुरुआत में जब देश में टीकाकरण प्रारंभ हुआ तो ऐसा लगा कि कोरोना अब बीते दिनों की बात हो गई है, हालांकि अप्रैल-मई में जैसा विकराल रूप लिए यह वायरस लौटा, उसने सबके मन में डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया। विशेषकर डायबिटीज के रोगियों के लिए चुनौतियां और बढ़ गईं, क्योंकि मधुमेह को कोविड-19 का एक प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है। इलाज के लिए लोग अस्पतालों में आने से डरने लगे जिसके कारण स्थिति के जटिल रूप लेने का खतरा बढ़ गया था। हमने ऑनलाइन माध्यम से लोगों को इलाज उपलब्ध कराना शुरू किया। स्थितियां चुनौतीपूर्ण जरूर थीं लेकिन हम स्वास्थ्य कर्मियों ने इसका मिलकर सामना किया।
 
एक खास बात शेयर करना चाहूंगा- साल 1921 में पहली बार डॉ फ्रेडरिक बैंटिंग और डॉ चार्ल्स बेस्ट के नेतृत्व वाली टीम ने इंसुलिन की खोज की थी, साल 2021 में इसके 100 साल भी पूरे हुए हैं। नवंबर में मधुमेह जागरूकता माह के दौरान मैंने डायबिटीज रोगियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के वैश्विक मंच डायबिटर्स पर भारत का प्रतिनिधित्व कर लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता लाने को लेकर प्रयास किया। 

हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में साल 2021 से ली गई सीख और जागरूकता के साथ हमें साल 2022 में कदम रखने की जरूरत है। सेहत के प्रति इस साल और आने वाले वर्षों में हमें लगातार सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। उम्मीद करते हैं, यह नया साल पूरे विश्व के लिए सुखमय और सेहतमंद होगा।


 
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