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World Mental Health Day: पाचन विकारों से अक्सर रहते हैं परेशान? कहीं आपको मानसिक स्वास्थ्य की समस्या तो नहीं

Thu, 10 Oct 2024 11:25 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेट दर्द के कारण - फोटो : Freepik.com
पेट दर्द एक सामान्य समस्या है, ये किसी को भी हो सकती है। आमतौर पर गैस, कब्ज या अपच के कारण पेट में दर्द हो सकता है, जोकि सामान्य दवाओं और घरेलू उपचार से ठीक भी हो जाता है। पर अगर आपको लंबे समय से पेट में दर्द या पाचन में गड़बड़ी की दिक्कत बनी हुई है और सामान्य उपचार के माध्यम से ये ठीक नहीं हो रहा है तो सावधान हो जाइए, कहीं ये मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का संकेत तो नहीं है?

जी हां, आपने सही सुना। पाचन तंत्र में गड़बड़ी कुछ स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य विकारों का लक्षण हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) और स्ट्रेस-एंग्जाइटी जैसी मानसिक समस्याओं के बीच लिंक देखा गया है। यानी कि अगर आपको लंबे समय तक जीईआरडी के लक्षण बने रहते हैं और उपचार से आराम नहीं मिल रहा है तो एक बार किसी मनोचिकित्सक से जरूर मिल लेना चाहिए। 

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के साथ सामाजिक कलंक की भावना दूर के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि पेट की समस्याओं का मेंटल हेल्थ से क्या संबंध हो सकता है?
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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Freepik.com
गट-ब्रेन हेल्थ कनेक्शन

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार गट-ब्रेन हेल्थ एक दूसरे से बड़े करीब से जुड़े होते हैं। आपको अगर अक्सर पेट में दर्द वाला अनुभव होता है, उल्टी महसूस होती है? अगर इन समस्याओं में सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिल पा रहा है तो हो सकता है ये स्ट्रेस या एंग्जाइटी के कारण हो रहा हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, तनाव या चिंता की स्थिति हमारे पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। हमारी आंतें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सेंट्रल नर्वस सिस्टम के द्वारा नियंत्रित होती हैं, ऐसे में यदि आपको मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है तो इसमें पाचन से संबंधित लक्षण भी दिख सकते हैं।
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गट हेल्थ - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

हार्वर्ड के विशेषज्ञ बताते हैं, अधिक तनाव लेने वाले लोगों में अक्सर पाचन की समस्या बनी रह सकती है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. टोरोसियन कहते हैं, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि तनाव की स्थिति में इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज जैसी समस्याओं का खतरा नहीं होता है, हालांकि ये पाचन के लक्षणों को जरूर गंभीर बना सकती है। स्ट्रेस और ट्रॉमा के शिकार लोगों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के बारे में सावधानी बरतनी चाहिए।

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तनाव के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
स्ट्रेस में क्यों होती है पाचन की दिक्कत?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर बनी रहने वाली चिंता-तनाव की स्थिति के कारण शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव होने लग जाते हैं जो गैस्ट्रिक रस के स्राव को बढ़ाती है, जिससे पेट में दर्द, सूजन, एसिडिटी और जलन होती है।

साल 2019 के एक अध्ययन में पाया गया कि जीईआरडी से पीड़ित लोगों में चिंता और अवसाद के लक्षण काफी अधिक थे, खासकर उन लोगों में जिन्होंने सीने में दर्द की भी शिकायत हो रही थी। जीईआरडी और चिंता विकार दोनों ही सीने में दर्द का कारण बन सकते हैं, ये लक्षण अक्सर हार्ट अटैक जैसे महसूस होते हैं। 
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तनाव को करें कंट्रोल - फोटो : freepik.com
स्ट्रेस को करें कंट्रोल

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसा नहीं है कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं होते ही ये समझ लें कि आपको कोई मानसिक दिक्कत हो गई है, हालांकि अगर सामान्य इलाज से आराम न मिले निश्चित ही सावधान हो जाना चाहिए। सभी लोगों को स्ट्रेस को कंट्रोल करने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि इससे सिर्फ पाचन ही नहीं, हृदय गति बढ़ने, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की भी दिक्कत हो सकती है। लंबे समय तक बने रहने वाली तनाव की समस्या को कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य विकारों का भी कारण माना जाता है। 


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स्रोत और संदर्भ
The gut-brain connection


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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