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World Mental Health Day 2024: मानसिक रोग इन बीमारियों का भी बढ़ा सकते हैं खतरा, ऐसे लक्षण हैं तो हो जाइए अलर्ट

Thu, 10 Oct 2024 11:25 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2024 - फोटो : Freepik.com
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं, सभी उम्र के लोगों को इसका शिकार पाया जा रहा है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी से लेकर डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं। 

मन और शरीर को अक्सर अलग-अलग माना जाता है, हालांकि डॉक्टर कहते हैं, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य वास्तव में एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं। अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आपके शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। स्ट्रेस-डिप्रेशन जैसी समस्याओं का यदि समय पर निदान या इलाज न हो पाए तो इसके कारण कई तरह की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। 

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के साथ सामाजिक कलंक की भावना दूर के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से किस तरह से जुड़े हैं और मेंटल हेल्थ की समस्या किस प्रकार से शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर निर्मल सिंह बताते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने और कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के खतरे के कम करने के लिए मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना बहुत जरूरी माना जाता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि सकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं जिन लोगों को स्ट्रेस-एंग्जाइटी या अन्य किसी प्रकार की दिक्कत होती है उनमें न्यूरोलॉजिकल बीमारियों सहित अस्थमा, हृदय रोगों को जोखिम बढ़ सकता है।
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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
नींद होने लगती है प्रभावित

मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति वाले लगभग 50% से 80% लोगों को नींद की समस्या होने लगती है। हालांकि सामान्य आबादी में से केवल 10% से 18% लोगों को नींद की समस्या का अनुभव होता है। नींद न आने या नींद की कमी होने को कई प्रकार की बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। नींद संबंधी विकार हृदय रोग, स्ट्रोक और मधुमेह जैसी गंभीर चिकित्सा स्थितियों का खतरा बढ़ा देते हैं। 

इसके अलावा नींद की कमी के कारण वजन बढ़ने का भी जोखिम रहता है जिसे डायबिटीज और हार्ट की समस्याओं का प्रमुख कारण माना जाता है। 

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डायबिटीज का हो सकता है खतरा - फोटो : Adobe stock
क्रोनिक बीमारियों का खतरा

अध्ययनों में पाया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य में गड़बड़ी के शिकार लोगों में क्रोनिक बीमारियों जैसे मधुमेह, अस्थमा, कैंसर, हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि डिप्रेशन के शिकार लोगों में हृदय रोग, स्ट्रोक होने का जोखिम हो सकता है। मेंटल हेल्थ की समस्या में होने वाले हार्मोनल बदलाव का संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा जाता रहा है। 
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
बढ़ते हृदय रोगों की भी एक वजह

हृदय रोग, हार्ट अटैक के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं, इसके लिए खराब मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को भी एक कारण माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसी तरह अकेलापन महसूस करना या सोशल आइसोलेशन में रहने वाले लोगों में भी हृदय रोगों से संबंधित समस्याएं देखी जाती रही हैं। 


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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