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सावधान: जीवनशैली की ऐसी आदतें कमजोर कर देती हैं घुटने और हड्डियां, तुरंत बना लें इनसे दूरी

Sun, 25 Jul 2021 09:48 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कम उम्र में ही कमरदर्द की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


हमारे समाज में ऐसी अवधारणा चली आ रही है कि उम्र बढ़ने के साथ ही लोगों में गठिया और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। पर आपने भी अपने आस-पास कई ऐसे बुजुर्गों को देखा है जिनको जोड़ों के दर्द की बिल्कुल भी शिकायत नहीं होती है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सिर्फ उम्र के कारण जोड़ों या हड्डियों की समस्या नहीं होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि मौजूदा समय में हमारी जीवनशैली की आदतें इतनी खराब हो गई हैं कि बहुत ही कम उम्र में भी लोगों को हड्डियों और जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर कहते हैं, जोड़ों में दर्द की समस्या का मुख्यकारण हमारी खराब आदतें हो सकती हैं। मौजूदा समय में भोजन की पौष्टिकता और हमारी शारीरिक सक्रियता दोनों ही कम हो गई हैं, इसका सीधा असर हड्डियों को कमजोर कर रहा है। यही कारण है कि कम उम्र में ही लोगों को पीठ और कमर में दर्द के साथ घुटनों में दर्द की दिक्कतें हो रही हैं। इन समस्याओं से बचे रहने के लिए सभी लोगों को जीवनशैली को ठीक रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में जानते हैं जो कम उम्र में ही आपको  जोड़ों या हड्डियों में समस्या का शिकार बना सकती हैं।
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कोरोना के कारण घरों में रहने को मजबूर लोग - फोटो : Social media
पूरे दिन बंद कमरों में रहना
डॉक्टर कहते हैं कि ऑफिस के काम के चलते पहले लोगों को पूरे दिन छत के नीचे काम करना पड़ता था, उसपर कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन ने लोगों को घरों में रहने को और भी मजबूर कर दिया है। इस आदत के चलते लोगों में विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ती जा रही है। हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन-डी बेहद आवश्यक होता है। सूर्य के प्रकाश को विटामिन डी का मुख्य स्रोत माना जाता है, चूंकि हम घर के बाहर पर्याप्त समय नहीं बिताते हैं, ऐसे में शरीर में इस पोषक तत्व की कमी बढ़ती जा रही है। विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए  सैल्मन फिश, अंडे की जर्दी और विटामिन-डी से भरपूर आहार का सेवन जरूर करना चाहिए।
 
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भोजन में नमक की मात्रा कम करें - फोटो : pxiabay
बहुत अधिक नमक युक्त चीजें खाना
डॉक्टर बताते हैं कि मौजूदा समय में हम कई सारी ऐसी चीजों का सेवन अधिक कर रहे हैं जिनमें नमक की मात्रा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ज्यादा होती है। नमक के अधिक सेवन से हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। प्रतिदिन सिर्फ एक ग्राम अतिरिक्त मात्रा में सोडियम का सेवन वयस्क लोगों में हर साल हड्डियों के घनत्व में 1 फीसदी की कमी का कारण बन रहा है। इसलिए हर दिन 1500 मिलीग्राम से कम सोडियम लेने की सलाह दी जाती है।

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शराब से बना लें दूरी - फोटो : PTI
शराब और धूम्रपान
शराब और धूम्रपान, दोनों को ही स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए काफी नुकसानदायक बताते हैं। जो लोग तंबाकू का अधिक सेवन करते हैं उनमें हड्डियों का घनत्व कम होता है। फ्री रेडिकल्स आपकी हड्डियों को बनाने वाली कोशिकाओं को मार देते हैं। धूम्रपान, तनाव वाले कोर्टिसोल हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ाता है जो कैल्सीटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम करता है। कैल्सीटोनिन, हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होता है।
इसके अलावा शराब भी शरीर में कोर्टिसोल के उत्पादन को बढ़ाती है जिससे बोन स्टॉक कम हो जाता है। शराब, शरीर में टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन के स्तर को भी प्रभावित करती है, ये हार्मोन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
 
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शारीरिक कार्यों में आ गई है कमी - फोटो : Social media
शारीरिक गतिविधि में कमी
जिन लोगों की शारीरिक गतिविधि कम होती है ऐसे लोगों में अधिक तेजी से हड्डियों के क्षरण का खतरा होता है। इसलिए जब हड्डी के स्वास्थ्य की बात आती है तो व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण होता जता है। कोरोना काल में लगे प्रतिबंधों के कारण भी लोगों की शारीरिक गतिविधि में कमी आ गई है, जिसका असर हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।



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नोट: यह लेख डॉ. परवेश के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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