कैंसर के उपचार के लिए कीमोथेरपी को सबसे प्रभावी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमोथेरेपी के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है। लेकिन अगर आपको पता चले कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं स्वयं को कीमोथेरेपी के प्रभाव से भी सुरक्षित रख सकती हैं तो? यह निश्चित ही विशेषज्ञों को चिंता में डालने के लिए पर्याप्त है। खबर भी कुछ ऐसी ही है़, एक अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया है कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं कीमोथेरपी के प्रभावों से स्वयं को बचा लेती हैं। दोबारा से शरीर का माहौल अनुकूल हो जाने पर यह कोशिकाएं सक्रिय होकर कैंसर के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं-
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Bacteriophages target bacteria without harming the body's cells
- फोटो : Alamy
विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन के दौरान पाया कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं कीमोथेरपी के प्रभावों को चकमा देकर स्वयं को सुरिक्षत कर लेती हैं। न्यूयार्क के विल कॉरनेल मेडिसिंस में अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों को इस बारे में पता चला। वैज्ञानिकों ने पाया कि कीमोथेरेपी के दौरान कैंसर की कुछ कोशिकाएं सेनेसेंस यानी स्वयं को बुढ़ापे की ओर लेकर जाकर एक्टिव हाइबरनेशन यानी शांत अवस्था में डाल देती हैं। ऐसा करने से उन कोशिकाओं पर थेरपी का ज्यादा असर नहीं होता है और इस तरह से ये कोशिकाएं सुरिक्षत बच जाती हैं, जिनके बाद में असर डालने का डर बना रहता है।
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कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिका
- फोटो : Ehre Lab, UNC School of Medicine
तो क्या इलाज के बाद भी बना रह सकता है कैंसर का खतरा?
इस रिपोर्ट ने विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कीमोथेरपी जैसे प्रभावी इलाज के बाद भी कैंसर को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जी सकता है? कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समस्या से मुकाबले के लिए ऐसी तकनीकि या फिर ऐसी दवाओं को विकसित करना होगा जो कैंसर की कोशिकाओं को हाइबरनेशन में जाने ही न दें। जिससे कीमोथेरेपी का उनपर असर हो सके और कोशिकाओं को नष्ट किया जा सके।
कीमोथेरपी क्या है
कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज के लिए उपयोग में लाई जाने वाली प्रक्रिया है। इस थेरपी में दवाओं को प्रयोग में लाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और विभाजित होने से रोकती हैं। सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी कैंसर के दोबारा होने के जोखिम को भी कम कर सकती है।