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विशेषज्ञों की चेतावनी: अगर ऑफिसों ने नहीं किया इस दिशा में सुधार तो घट जाएगी कर्मचारियों की उत्पादकता

Sat, 11 Sep 2021 05:22 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ऑफिस के वातावरण का असर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
ऑफिस के माहौल और वातावरण का कर्मचारियों के मस्तिष्क और शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसी बारे में विस्तार से जानने के लिए अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कार्यालय के भीतर हवा की गुणवत्ता, कर्मचारियों की कार्य क्षमता पर प्रभाव डाल सकती है। अगर कार्यालय के भीतर के हवा की क्वालिटी सही नहीं है तो इसका असर वहां काम कर रहे लोगों के ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और प्रतिक्रिया देने के समय को प्रभावित कर सकती है। मोटे तौर पर देखा जाए तो ऑफिस के भीतर के हवा की गुणवत्ता का सीधा असर कर्मचारियों की प्रोडेक्टिविटी पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और उनकी कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए ऑफिस के भीतर अच्छे वेंटिलेशन और स्वच्छ हवा के आने की व्यव्स्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के नेतृत्व में एक साल तक किए गए इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले छह देशों के प्रतिभागियों को शामिल किया। अध्ययन में पाया गया कि सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम2.5) की बढ़ी हुई मात्रा और वेंटिलेशन की खराब व्यवस्था के कारण कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे की स्लाइडों में जानते हैं।
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हवा की क्वालिटी का पड़ता है असर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
हवा का अशुद्धि का सेहत पर असर
इन्वायरमेंटल रिसर्च लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ऑफिसों को भीतर PM2.5 और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के मस्तिष्क की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनडोर और आउटडोर, दोनों ही स्थितियों में वायु प्रदूषण का असर इंसान के मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। कुछ अध्ययनों ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि घर के भीतर PM2.5 के ज्यादा संपर्क में रहने के कारण लोगों को ज्यादा नुकसान हो सकता है।
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कर्मचारियों के कार्यक्षमता को जानने के लिए क्या गया अध्ययन - फोटो : pixabay
आधुनिक तकनीक के साथ किया गया परीक्षण
इस मुद्दे को बेहतर ढंग से समझने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने चीन, भारत, मैक्सिको, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के शहरों में 300 से अधिक कार्यालय कर्मचारियों को नामांकित किया। इन प्रतिभागियों के ऑफिस के पर्यावरण को जानने के लिए विशेष सेंसर दिया गया जो PM2.5 और कार्बनडाई ऑक्साइड के स्तर के साथ  तापमान और सापेक्ष ह्यूमेडिटी को माप सकती थी। प्रतिभागी के फोन में एक ऐप भी इंस्टॉल किया गया जिसके आधार पर कर्मचारियों का कॉग्नेटिव टेस्ट और सर्वेक्षण किया जा सकता था।

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हवा की अशुद्धि का कार्यक्षमता पर पड़ता है प्रभाव - फोटो : Pixabay
अध्ययन से क्या पता चला?
अध्ययन के परिणाम को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने दो प्रकार के परीक्षण किए। इन परीक्षणों के आधार पर प्रतिभागियों की चीजों पर समझने की गति और याददाश्त की शक्ति का आकलन किया गया। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया कि ज्यादा समय तक PM2.5 और कार्बनडाई ऑक्साइड के संपर्क में रहने वालों में चीजों को समझने और उनके जवाब देने की गति की क्षमता में देरी हो सकती है। इसके अलावा PM2.5 और कार्बनडाई ऑक्साइड के बढ़े हुए स्तर के संपर्क में रहने के कारण लोगों को याददाश्त से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। 
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ऑफिस का वातावरण साफ होना बेहद आवश्यक - फोटो : pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक जोसेफ एलन कहते हैं,  बेहतर वेंटिलेशन और हवा की स्वच्छता न सिर्फ कोरोना के इस दौर में संक्रमण के खतरे को कम कर सकती है, साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। ऑफिस में कर्मचारियों से बेहतर कार्य लेने के लिए भीतर की हवा की स्वच्छता और अच्छा वेंटिलेशन बहुत आवश्यक है। हवा की अशुद्धि मस्तिष्क के अलावा शरीर के कई अन्य अंगों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इस बारे में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 


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स्रोत और संदर्भ: 
Associations between acute exposures to PM2.5 and carbon dioxide indoors and cognitive function in office workers: a multicountry longitudinal prospective observational study

अस्वीकरण नोट: यह लेख इन्वायरमेंटल रिसर्च लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। 
 
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