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खुशखबरी: जल्द ही भारत में आएगी ये खास वैक्सीन, 'एक झटके में' होगा कोरोना का काम तमाम!

Wed, 15 Sep 2021 03:37 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्पूतनिक लाइट: सिंगल डोज कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


कोरोना महामारी को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है, टीकाकरण क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 75 करोड़ 89 लाख कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं। वैसे तो अभी देश में दो डोज वाली कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही भारत को सिंगल डोज वैक्सीन भी मिल सकती है। दरअसल, ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने रूस की स्पूतनिक लाइट वैक्सीन को भारत में तीसरे चरण के ट्रायल की मंजूरी दे दी है। यह सिंगल डोज वैक्सीन है। कई अध्ययनों में वैज्ञानिकों द्वारा यह दावा किया गया है कि स्पूतनिक लाइट वैक्सीन कोरोना के खिलाफ काफी असरदार है। भारत में वैसे पहले से ही रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह स्पूतनिक लाइट वैक्सीन, स्पूतनिक-वी से कैसे अलग है, इसकी प्रभावकारिता क्या है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
स्पूतनिक-वी से कैसे अलग है स्पूतनिक लाइट? 
  • पहली बात तो ये कि स्पूतनिक-वी दो डोज वाली वैक्सीन है, जिसे बनाने में दो अलग-अलग वेक्टर का उपयोग किया गया है। द लैंसेट नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, इसकी प्रभावकारिता 91.6 फीसदी के करीब पाई गई है। वहीं स्पूतनिक लाइट की अगर बात करें तो यह स्पूतनिक-वी वैक्सीन का पहला घटक है। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स प्रांत के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस वैक्सीन की प्रभावकारिता 78.6 से 83.7 फीसदी के बीच पाई गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्यों खास है स्पूतनिक लाइट? 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्पूतनिक लाइट सिंगल डोज वैक्सीन के आ जाने से कोरोना के खिलाफ टीकाकरण की रफ्तार को तेज करने में काफी मदद मिल सकती है। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष यानी आरडीआईएफ के प्रमुख किरिल दिमित्रीव ने पिछले महीने ही कहा था कि स्पूतनिक लाइट वैक्सीन कम समय सीमा में लोगों के बड़े समूह को प्रतिरक्षित करने की चुनौती को हल करने में कारगर साबित हो सकती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रूस में तो कोरोना की इस सिंगल डोज वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। आरडीआईएफ ने बताया है कि इस एक खुराक वाले टीके की कीमत 10 डॉलर यानी करीब 737 रुपये से भी कम है। इस लाइट वर्जन कोरोना वैक्सीन को भी मॉस्को के गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। इसे बनाने के लिए आरडीआईएफ) की ओर से वित्तीय सहायता दी गई थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
आरडीआईएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल दिमित्रिव ने कुछ महीने पहले ही यह दावा किया था कि यह स्पूतनिक लाइट वैक्सीन अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मामलों की संभावना को काफी कम कर देता है। उनका यह भी दावा था कि यह कोरोना वायरस के सभी नए वैरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी साबित हुआ है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
स्पूतनिक लाइट वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स?
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना की अन्य वैक्सीन की तरह ही स्पूतनिक लाइट वैक्सीन लेने वालों को भी हल्के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द आदि। अब तक हुए अध्ययनों में इस वैक्सीन से लोगों में खून के थक्के बनने जैसे मामले या कोई अन्य गंभीर दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिले हैं।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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