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शोधकर्ताओं का बड़ा दवा- 'लॉन्ग कोविड' जैसा कुछ भी नहीं, थकान-कमजोरी जैसी समस्याएं बहुत सामान्य

Fri, 15 Mar 2024 06:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड की समस्या - फोटो : istock
कोरोना, पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बना हुआ है। कोविड-19 को लेकर हाल में हुए कई अध्ययनों में संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी के साथ-साथ इसके पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड जोखिमों को लेकर भी अलर्ट किया जाता रहा है। पोस्ट कोविड का मतलब संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में लंबे समय तक बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं है। अध्ययनों में कहा जाता रहा है कि लॉन्ग कोविड के कारण फेफड़ों और हृदय से संबंधित समस्याओं के साथ ब्रेन की दिक्कत और आईक्यू लेवल कम होने जैसे समस्याएं भी हो सकती हैं।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने लॉन्ग कोविड की अवधारण को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड जैसा असल में कुछ होता ही नहीं है। ऑस्ट्रेलिया स्थित क्वींसलैंड हेल्थ द्वारा किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा, हमें कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों में ऐसा कोई बदलाव नहीं दिखा है जिसके आधार पर कहा जा सके कि ये लॉन्ग कोविड है।
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कोरोना के दुष्प्रभाव - फोटो : ANI
रोगियों के दीर्घकालिक लक्षणों में कोई खास अंतर नहीं?

अध्ययन में शोधकर्ताओं कहा, कोविड-19 से संक्रमित या निगेटिव रिपोर्ट वाले लोगों के अलावा जिन लोगों को फ्लू जैसा भी संक्रमण रहा है, हमें इन लोगों के बीच दीर्घकालिक प्रभावों में कोई अंतर नहीं दिखा। अध्ययन के लिए साल 2022 के अंत तक श्वसन संबंधी लक्षणों का अनुभव करने वाले 5,000 से अधिक प्रतिभागियों की जांच की गई, इस दौरान दुनियाभर में ओमिक्रॉन वैरिएंट का प्रसार प्रमुख था। इनमें से लगभग आधे लोगों का कोविड के लिए पॉजिटिव टेस्ट किया गया, जबकि निगेविट टेस्ट वालों में से कुछ लोगों में इन्फ्लूएंजा होने की पुष्टि की गई।
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लॉन्ग कोविड की समस्या - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ईसीसीएमआईडी) के अनुसार, अध्ययन से पता चलता है कि लॉन्ग कोविड के रूप में देखे जा रहे लक्षण मौसमी फ्लू और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे ही होते हैं, इनमें कोई खास अंतर नहीं देखा गया है। 

क्वींसलैंड के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जॉन जेरार्ड ने कहा कोविड-19 मामलों की बड़ी संख्या ने रोगियों के ठीक होने बाद के प्रभावों को और अधिक ध्यान देने योग्य बना दिया है। हालांकि जिस आबादी में ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका है वहां कोविड-19 के दीर्घकालिक जोखिम नहीं देखे जा रहे हैं।
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पोस्ट कोविड में होने वाली दिक्कते - फोटो : pixabay
लॉन्ग कोविड शब्दावली बंद करने की सलाह

शोधकर्ता कहते हैं, हमारे निष्कर्ष से जो बातें सामने आई हैं, उसके आधार पर कहा जा सकता है अब हमें "लॉन्ग कोविड" कहना बंद करने का समय है। यह शब्दावली अनावश्यक भय पैदा करती है और कुछ मामलों में हाइपरविजिलेंस और लॉन्ग कोविड का डर भी लोगों को बीमार बनाता जा रहा है। संक्रमण से ठीक होने के बाद स्वास्थ्य की उचित देखभाल पर ध्यान देकर सेहत को ठीक रखा जा सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Queensland's top doctor wants you to stop saying 'long COVID' following new study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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