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Year Ender 2023: इस साल मच्छरजनित रोगों ने किया खूब परेशान, साल के अंत में आई बड़ी खुशखबरी

Sun, 17 Dec 2023 05:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां - फोटो : istock
मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां हर साल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियों का कारण बनती हैं। डेंगू से लेकर चिकनगुनिया, मलेरिया से लेकर जीका जैसे रोग मच्छरों के काटने से फैलते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इन रोगों के कारण हर साल हजारों की मौत हो जाती है। विशेषतौर पर बरसात के दिनों में जब वातावरण मच्छरों के प्रजनन के अनुकूल हो जाता है, उस समय हर साल इन रोगों के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे जाते रहे हैं। साल 2023 में भी मच्छरजनित रोगों ने लोगों को खूब परेशान किया।

साल 2023 में अब कुछ ही दिन शेष हैं और हम नए साल 2024 में प्रवेश करने जा रहे हैं। ऐसे में आइए इस पूरे साल मच्छरों के कारण देशभर में हुई समस्याओं पर एक नजर डालते हैं। हालांकि साल के अंत में बड़ी खुशखबरी सामने आई।
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डेंगू के केस - फोटो : istock
डेंगू ने किया खूब परेशान

इस पूरे साल वैसे तो मच्छरों के कारण होने वाली कई बीमारियों ने लोगों को खूब परेशान किया, पर सबसे दिक्कत बढ़ाई डेंगू की समस्या ने। भारत ही नहीं पड़ोसी देशों में भी इस बार डेंगू के कारण एक समय स्थिति काफी बिगड़ती हुई देखी गई।

राजधानी दिल्ली-एनसीआर में साल के शुरुआती महीनों में असमय भारी बारिश के कारण उपजी बाढ़-जलजमाव  की स्थिति ने मच्छर जनित बीमारियों के जोखिमों को काफी बढ़ा दिया था।  दिल्ली में डेंगू ने करीब छह साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, 2018 के बाद पहली बार जुलाई में डेंगू के सबसे ज्यादा केस दर्ज किए गए। अगस्त-अकतूबर के माह में भी डेंगू के कारण अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ देखी जाती रही।
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मच्छरजनित रोगों का खतरा - फोटो : istock
डेंगू के सबसे खतरनाक स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता

जुलाई-अगस्त के महीनों में राजधानी दिल्ली में डेंगू के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार अलर्ट पर आ गई। मरीजों के सैंपल जीनोम टेस्टिंग के लिए भेजे गए जिसमें यहां डेंगू के गंभीर स्ट्रेन टाइप-2 डेंगू के मामले बढ़ते हुए देखे गए। 

डेंगू का संक्रमण, डेंगू वायरस (DENV) के कारण होता है, जो संक्रमित मच्छरों, मुख्यरूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर दिन के समय में अधिक काटते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप हैं- DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4। दिल्ली में सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करने पर पता चला कि ज्यादातर रोगियों में स्ट्रेन टाइप-2 का खतरा था। DENV-2 के कारण रोग के गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक हो सकता है। 

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डेंगू संक्रमण का कहर - फोटो : istock
पड़ोसी देश में भी डेंगू का रहा कहर

भारत ही नहीं डेंगू के मामलों ने इस बार पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए भी मुश्किलें काफी बढ़ा दी थीं। जुलाई-अगस्त के महीनों तक ही देश में इस साल डेंगू संक्रमण की संख्या 40 हजार को पार कर गई थी। गौरतलब है कि इससे पहले साल 2022 में यहां डेंगू वायरस के कारण 281 लोगों की मौत हुई थी जो साल 2000 के बाद से सबसे अधिक है। साल 2023 में डेंगू के कारण हालात और भी बदतर देखे गए।
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मलेरिया का खतरा - फोटो : istock
मलेरिया भी रहा बड़ी चिंता

डेंगू के साथ ही साथ मलेरिया के मामलों के कारण भी देशभर के अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ती हुई रिपोर्ट की गई। हालांकि ज्यादातर रोगी आसानी से ठीक हो जा रहे थे। समय रहते मलेरिया की स्थिति को देश में कंट्रोल कर लिया गया। इससे पहले साल 2022 में भारत में 45 हजार से अधिक मलेरिया के मामले रिपोर्ट किए गए थे, जबकि 2021 में करीब 1.6 लोगों में इस रोग की पुष्टि हुई थी। 

हालांकि मलेरिया के मामलों ने इस साल अमेरिका में जरूर समस्या बढ़ा दी। दक्षिणी अमेरिका के कुछ स्टेट्स में मलेरिया के केस तेजी से बढ़े। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक 2003 के बाद से देश में स्थानीय रूप से रिपोर्ट किए गए मलेरिया के ये पहले ज्ञात मामले थे। मलेरिया को अमेरिका में एंडेमिक मान लिया गया था, हालांकि एक बार फिर से इन मामलों की पुष्टि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी। 
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारी - फोटो : iStock
चिकनगुनिया और जीका के मामले

डेंगू और मलेरिया के साथ-साथ बरसात के महीनों में देश में चिकनगुनिया और जीका के भी केस रिपोर्ट किए गए, हालांकि समय रहते इनपर कंट्रोल पा लिया गया। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों वायरल बीमारियां हैं जो एडीज मच्छरों के काटने से फैलती हैं। एडीज एजिप्टी से डेंगू का संक्रमण होता है जबकि एडीज एल्बोपिक्टस से चिकनगुनिया होने का जोखिम रहता है।

वहीं अगस्त के आखिरी दिनों में मुंबई में जीका वायरस के मामले की पुष्टि ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया, समय रहते इसपर भी कंट्रोल कर लिया गया। 
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मच्छरजनित रोगों का खतरा - फोटो : iStock
मच्छरजनित रोगों को लेकर बड़ी खुशखबरी

मच्छरजनित कई रोगों ने इस साल मुश्किलें जरूर बढ़ाईं पर साल खत्म होते होते मेडिकल साइंस के लिए एक खुशखबरी भी सामने आई। 

यूएस हेल्थ अथॉरिटी ने 9 नवंबर को चिकनगुनिया के लिए दुनिया के पहले टीके को मंजूरी दे दी। एफडीए की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक यूरोप के वलनेवा कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन-इक्स्चिक, दुनियाभर में हर साल होने वाले चिकनगुनिया के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है। क्लीनिकल ट्रायल में इस टीके के आशाजनक परिणाम देखे गए। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस टीके से आगामी वर्षों में इस गंभीर रोग के खतरे को कम करने में मदद मिल सकेगी।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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