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जानिए छींकने का सही तरीका, कई सारी बीमारियों से रहेंगे दूर

Mon, 07 Jun 2021 04:45 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बहुत ही कम लोगों को इसका शऊर होता है - फोटो : Pixabay

Medically reviewed by Dr. Vishesh Akole

डॉ विशेष अकोले, जनरल फिजिशियन

संत रविदास हॉस्पिटल, इंदौर

डिग्री- एम.बी.बी.एस

अनुभव- 28 वर्ष

एक सभ्य नागरिक बनाने के लिए हमें ठीक से हाथों को साफ करना, दांतों को ब्रश करना या भोजन को ठीक से चबाना सिखाया जाता है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को इसका शऊर होता है कि ठीक से छींका कैसे जाए और पिछले डेढ़ साल में हम देख ही चुके हैं कि सही तरीके से न छींकने से किस तरह से कोरोना महामारी के संक्रमण को फैलाया गया है इसलिए बहुत जरूरी है कि आज की तारीख में हमें छींक के बारे में सही जानकारी हो, साथ ही हमें पता हो कि छींकने का सही तरीका क्या होता है। छींकते वक्त किन चीजों का ध्यान रखकर हम अपने साथ न जाने कितने ही लोगों की सेहत का ध्यान रख सकते हैं, उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं छींक से जुड़ी काम की बातें, जो हम सभी को पता होना चाहिए। 

 

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गति 30 मील प्रति घंटा भी हो सकती है - फोटो : Pixabay

क्यों आती है छींक?
हमें छींक इसलिए आती है क्योंकि यह शरीर की प्रतिक्रियात्मक क्रिया है। नाक के भीतर किसी भी प्रकार की जलन या उत्तेजना होने पर शरीर खास किस्म का केमिकल सिग्नल मस्तिष्क को भेजता है। इसके परिणामस्वरूप हवा का तीव्र निष्कासन नाक और मुंह द्वारा होता है जिसकी गति 30 मील प्रति घंटा भी हो सकती है।


 

 

 


 

 

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हर छींक के बाद हाथ धोना न भूलें - फोटो : social media

यह है सही तरीका
किसी टिश्यू में छींक कर उसे तुरंत फेंक दें। टिश्यू न हो तो छींकते वक्त नाक को कोहनी से ढंक लें। यदि लम्बी बांह का शर्ट आदि पहना है तो और भी अच्छा। इसका फायदा है कि आपकी कोहनी से कीटाणु अन्य जगह नहीं फैल पाएंगे और कपड़े के कारण कीटाणु वातावरण में भी नहीं फैल पाएंगे। लेकिन, हर छींक के बाद हाथ धोना न भूलें।


 

 


 

 


 

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यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है - फोटो : सोशल मीडिया

न रोकें छींक
यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है खासकर उनके लिए जिन्हें कान में संक्रमण या रक्तचाप की समस्या है। इससे नाक से रक्त आना, सिरदर्द, चक्कर आना, कान में कोई संक्रमण, साइसाइटिस जैसी परेशानियां हो सकती हैं। एक मामले में ब्रिटिश नागरिक को नाक और मुंह दबाकर छींक रोकने के कारण अपनी आवाज खोनी पड़ी थी।


 

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फोटिक स्नीज रिफ्लेक्स या सोलर स्नीज रिफ्लेक्स कहा जाता है - फोटो : social media

धूप के कारण छींक
कई लोगों को तेज धूप में देखते ही छींक आने लगती है। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है। इसे फोटिक स्नीज रिफ्लेक्स या सोलर स्नीज रिफ्लेक्स कहा जाता है। अनुमानित तौर पर 10 से 35 प्रतिशत जनसंख्या इस रिफ्लेक्स से प्रभावित है।

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छींककर हम बीमारियों को फैलाते ही हैं - फोटो : Pixabay

क्यों न छींके हाथों पर
प्रत्येक छींक के साथ विभिन्न प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और अन्य विषाणु फैलते हैं जिनका दायरा 20 फीट तक हो सकता है। ये रोगजनक कीटाणु आपके हाथों द्वारा दरवाजे के हैंडल, डेस्क, फोन जैसी अन्य वस्तुओं पर आसानी से जम जाते हैं और कई घंटों तक इन पर कई घंटाें तक रह सकते हैं। छींकने के बाद किसी से हाथ मिलाना भी ठीक नहीं है। छींककर हम बीमारियों को फैलाते ही हैं। 

नोट- यह लेख संत रविदास हॉस्पिटल के डॉक्टर विशेष अकोले से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर विशेष अकोले पिछले 28 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री जी.एस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उत्तर प्रदेश से ली है।

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 
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