Medically Reviewed by-
डॉ तरंग प्रीत कौर
प्रसूति एंव स्त्री रोग विशेषज्ञ
एम्स, दिल्ली
कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीनेशन को ढाल के रूप में देखा जा रहा है। देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग टीके लगवा सकते हैं। हाल ही में वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल में बदलाव करते हुए सरकार ने स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी टीकाकरण कराने की अनुमित दे दी है, हालांकि अब भी गर्भवती महिलाओं को इससे बाहर रखा गया है। कोविड वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में अब भी तमाम तरह के सवाल हैं। ऐसा ही एक सवाल है कि क्या कोरोना की वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग तरह से असर करती है? क्या महिलाओं को साइड-इफेक्ट्स होने का खतरा पुरुषों से ज्यादा होता है?
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में भारत में महिलाएं वैक्सीनेशन भी कम करा रही हैं। रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि कई तरह के मिथकों जैसे- वैक्सीनेशन के अधिक दुष्प्रभाव, प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर के कारण महिलाएं अब भी टीकाकरण से हिचकिचा रही हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि महिलाओं में इस तरह की चिंता कितनी जायज है?