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बच्चों की वैक्सीन: 56 दिनों के ट्रायल पर ही कोवाक्सिन को मिल सकती है मंजूरी, जानें परीक्षण में कैसे रहे परिणाम

Mon, 23 Aug 2021 12:30 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कई अध्ययनों में वैज्ञानिक स्पष्ट कर चुके हैं कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर से उन लोगों को खतरा अधिक हो सकता है जिनका अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है। इस लिहाजे से बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि अब तक 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण कराने की अनुमति नहीं मिल सकी है। इस दिशा में तेजी से प्रयास करते हुए हाल ही में भारत सरकार ने स्वदेशी वैक्सीन जाइकोब-डी को आपातकालीन उपयोग की मान्यता दे दी है, यह वैक्सीन 12-18 साल का आयु के बच्चों के लिए उपयुक्त बताई जा रही है। इस बीच खबर है कि जल्द ही ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) बच्चों के लिए और अन्य वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे सकती है।
सूत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक जल्द ही 'कोवाक्सिन' को बच्चों के लिए इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है। प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक परीक्षण के दौरान प्रतिभागी बच्चों में वैक्सीनेशन का काम पूरा हो चुका है, अब इसके चरणबद्ध परिणाम का इंतजार किया जा रहा है। बच्चों में इस वैक्सीन की प्रभावशीलता की जांच के लिए रक्त के सैंपल तीसरी बार भेजे गए हैं। कर्नाटक में कुल 90 बच्चों पर कोवैक्सिन का परीक्षण किया जा रहा है। आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में और विस्तार से जानते हैं।
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बच्चों में वैक्सीन का ट्रायल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
बच्चों पर वैक्सीन का परीक्षण
सूत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक वैसे तो ट्रायल की अंतिम रिपोर्ट आने में अभी 5 से 6 महीने और लग सकते हैं, हालांकि जिस तरह से वर्तमान की परिस्थितियां बन रही हैं ऐसे में इतना इंतजार नहीं किया जा सकता है। इसे देखते हुए ट्रायल पूरा होने से पहले ही इसे सरकार की तरफ से आपातकालीन उपयोग के लिए हरी झंडी मिल सकती है। बच्चों में संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार इस तरह के निर्णय ले सकती है। बच्चों में वैक्सीन के परीक्षण को अभी करीब 56 दिन पूरे हुए हैं। 
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कोवैक्सीन की ट्रायल (सांकेतिक) - फोटो : PTI
ट्रायल की फाइनल रिपोर्ट आने से पहली ही मिल सकती है मंजूरी
सूत्र बताते हैं, बच्चों में कोवैक्सीन के ट्रायल की फाइनल रिपोर्ट आने में अभी चूंकि करीब 5 महीने से अधिक का समय लगता दिख रहा है, ऐसे में सरकार और डीजीसीआई परीक्षण ट्रायल के 50-55 दिन बाद ही इसके आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे सकती है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं होगा, इससे पहले वयस्कों के लिए भी वैक्सीन को मंजूरी देते समय भी ट्रायल के 210 दिन पूरे होने तक इंतजार नहीं किया था। चूंकि कोरोना के नए वैरिएंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में बच्चों को सुरक्षा की डोज देना काफी जरूर हो गया है।

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वैक्सीन का किया जा रहा है परीक्षण - फोटो : PTI
मैसूर में किया जा रहा है परीक्षण
गौरतलब है कि मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमएमसीआरआई) से संबंधित चेलुवंबा अस्पताल में बच्चों पर कोवैक्सिन का क्लिनिकल परीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में बच्चों के शरीर में वैक्सीन सी बनी एंटीबॉडीज की जांच करने के लिए तीसरी बार रक्त के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि इस परीक्षण से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर डीसीजीआई टीकों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के बाद बच्चों के लिए टीकों के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे सकती है। 
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वैक्सीन का परीक्षण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media
बच्चों में वैक्सीन की परीक्षण कैसे होता है?
बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन के ट्रायल के लिए ब्लड के सैंपल लेने के साथ 0 से 28 दिनों के बीच दो बार टीके दिए जाते हैं। इसके बाद 56वें दिन फिर से रक्त के सैंपल को जांच के लिए भेजा जाता है जिससे शरीर में बनीं एंटीबॉडीज की पता लगाया जा सके। इसी तरह से ट्रायल के 118वें और 210वें दिन ब्लड सैंपलिंग करके एंटीबॉडीज के स्तर की जांच की जाती है। अब तक के ट्रायल को लेकर मिल रही जानकारियों के मुताबिक परीक्षण के दौरान बच्चों में वैक्सीन को सुरक्षित पाया गया है। 10-12 साल की आयु वाले कुछ बच्चों में हल्के बुखार और दर्द जैसे साइड-इफेक्ट्स जरूर देखे गए हैं, हालांकि यह लक्षण भी एक या दो दिनों के बाद गायब हो जाते हैं। बच्चों में टीकाकरण से संबंधित फिलहाल कोई जटिलता नहीं देखने को मिली है।


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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इससे संबंधित किसी प्रकार का दावा नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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