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अलर्ट: कोरोना से ठीक होने के बाद हो सकती है ये जानलेवा बीमारी, अगर नहीं दिया लक्षणों पर ध्यान

Mon, 23 Aug 2021 10:57 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Sudhir Chaudhary

डॉ. सुधीर चौधरी

क्षय रोग एवं श्वसन रोग विशेषज्ञ, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी (क्षय रोग एवं श्वसन रोग)
अनुभव- 38 वर्ष


कोरोना एक गंभीर और जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। चाहे आप संक्रमित हों या संक्रमण से ठीक हो गए हों, यह सभी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में अब टीबी जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ गया है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ के. सुधाकर ने हाल ही में बताया था कि राज्य में अब तक 24-25 ऐसे मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें लोगों को पहले कोरोना हुआ था और फिर रिकवरी के बाद वे टीबी का शिकार हो गए। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर सरकार ने पूरे राज्य में कोरोना से ठीक हुए मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, ताकि मरीजों में टीबी का पता जल्दी लगाया जा सके और जल्द से जल्द उनका इलाज किया जा सके, क्योंकि जितनी देर होगी, बीमारी उतनी ही गंभीर होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड-19 और टीबी, दोनों काफी हद तक एक जैसी ही बीमारियां हैं। दोनों ही सांस से जुड़ी बीमारियां हैं, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और सबसे खतरनाक बात कि दोनों ही बीमारियां संक्रामक हैं। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है जानलेवा 

विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉन्ग कोविड और टीबी के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, ऐसे में लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। दरअसल, कोरोना से ठीक होने के बाद कई लोगों में सांस लेने में दिक्कत और खांसी की समस्या बनी रहती है, टीबी में भी ऐसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए कोरोना से ठीक होने के बाद अगर आपको भी ऐसी समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर टीबी का भी टेस्ट जरूर कराएं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या हो सकता है टीबी का कारण? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल, कमजोर इम्यूनिटी और फेफड़ों में संक्रमण का बढ़ना, टीबी के होने का कारण हो सकता है। दरअसल, टीबी एक संक्रामक रोग है और यह उस व्यक्ति को जल्दी अपनी चपेट में ले लेता है, जिसकी इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क 
  • चूंकि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की रोग प्रतिरोक्षक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है और ऐसे में उसे कोरोना हुआ हो तो जाहिर है इम्यूनिटी और भी कमजोर हो जाएगी। ऐसे में टीबी की बीमारी भी उसे बड़ी आसानी से हो सकती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को कोरोना से बेहद ही सतर्क रहने और शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रण में रखने की जरूरत है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना से ठीक होने के बाद इन लक्षणों पर भी दें ध्यान 
  • कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों में कमजोरी, थकान, घबराहट, अवसाद, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, स्वाद और गंध अनुभव न होना, बाल झड़ना और नींद संबंधी परेशानियां तो आम हैं, लेकिन सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, हार्ट रेट बढ़ जाना और हार्ट की नसों में क्लॉट (थक्के) बन जाना, गंभीर समस्याएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, वरना ये जानलेवा हो सकती हैं। 
नोट: डॉ. सुधीर चौधरी रेस्पिरेटरी मेडिसिन में क्वालिफाइड कंसल्टेंट हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया, फिर इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमडी (क्षय रोग एवं श्वसन रोग) की पढ़ाई पूरी की। इनके पास आईएमए की सदस्यता भी है। डॉ. सुधीर चौधरी को इस क्षेत्र में 38 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।  
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