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बढ़ता कोरोना संकट: दिल्ली में सामने आए डराने वाले आंकड़े, बच्चे ज्यादा संक्रमित, विशेषज्ञ ने बताया- ऐसे रहें सुरक्षित

Mon, 18 Apr 2022 04:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस के बढ़ते मामले - फोटो : iStock
Medically reviewed by-
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली


दिसंबर-जनवरी के समय देश में आई कोरोना की तीसरी लहर के बाद एक समय ऐसा लगने लगा था कि हालात सुधर रहे हैं और सामान्य जनजीवन फिर से पटरी पर आने लगा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में राजधानी दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में जिस तरह से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, उसके आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में बच्चों में तेजी से संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, नतीजतन कुछ स्कूलों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है जबकि कुछ में फिर से ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। वैश्विक स्तर पर सामने आए कोरोना के कुछ वैरिएंट्स की प्रकृति और देश में संक्रमण के बढ़ते आंकड़े काफी डराने वाले हैं। 
हाल ही में 'लोकलसर्किल' नाम के सर्वेक्षण फर्म ने जो रिपोर्ट दी है वह बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। सर्वे के मुताबिक पिछले 15 दिनों में दिल्ली-एनसीआर में कोरोना के मामलों में 500 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस सर्वे में दिल्ली-एनसीआर के लगभग 19 प्रतिशत निवासियों को शामिल किया गया। इससे प्राप्त कोरोना के आंकड़े गंभीर स्थिति की ओर संकेत करते हैं। 
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कोरोना संक्रमण के दिल्ली में बढ़े मामले - फोटो : iStock
सर्वे की मुख्य बातें

फर्म की रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली और एनसीआर के सभी जिलों से करीब 11,743 लोगों से कोरोना के संबंध में इनपुट प्राप्त हुए। इनसे जानने की कोशिश की गई कि परिवार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी में कितने लोग  पिछले 15 दिनों में संक्रमण के शिकार हुए हैं? इसके आधार पर एक खांका तैयार किया गया, जिससे यह पता चलता है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में पिछले 15 दिनों से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 
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बच्चों में कोरोना का खतरा(सांकेतिक) - फोटो : istock
बच्चों में बढ़ता संक्रमण का जोखिम

पिछले दिनों कोरोना के बढ़ते मामलों में सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखा जा रहा है। पहले नोएडा और गाजियाबाद के कुछ स्कूलों में 23 से अधिक बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई, वहीं पिछले 24 घंटे में एनसीआर में 22 नए बच्चों को संक्रमित पाया गया है। बच्चों में बढ़ता संक्रमण कई मामलों में डराने वाला है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी माता-पिता को बेहद सतर्कता बरतते रहने की सलाह देते हैं।

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क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ चिकित्सक और इंटरनेल मेडिसिन के एकस्पर्ट डॉ विक्रमजीत सिंह बताते हैं कि तीसरी लहर के बाद कम हुए मामलों के बीच जिस तरह से लोगों में बचाव के उपायों को लेकर लापरवाही देखने को मिली है, उसी के कारण एक बार फिर से आंकड़े बढ़ रहे हैं। लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को प्रयोग में लाने में काफी ढील दे दी है।

वहीं दूसरी तरह कोरोना के सामने आ रहे नए म्यूटेंट वैरिएंट्स अधिक संक्रामकता वाले हैं, जिनके बचाव के लिए विशेष सावधानी की जरूरत है। बच्चों का टीकाकरण न हो पाना उनमें संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ा देता है। वयस्कों की तरह बच्चों के लिए स्वयं से बचाव के उपाय करते रहना भी कठिन है जिस वजह से कोरोना के मामलों में फिर से उछाल देखने को मिल रहा है।
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संक्रमण से बचाव के तरीके - फोटो : Pixabay
इस समय कैसे रहें सुरक्षित?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से कोरोना की रफ्तार में बढ़ोतरी देखी जा रही है, वह निश्चित ही चिंताजनक है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए हमें कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। विशेषकर अध्ययनों में मास्क पहनने को कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी साधन बताया गया है, इसलिए सभी लोग घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें।

सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड हाइजीन का हम स्वयं और बच्चों में भी गंभीरता से ध्यान रखें। अगर बचाव के उपायों में सख्ती बरती जाती है तो कोरोना के प्रसार की रफ्तार पर रोक लगाई जा सकती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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