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अलर्ट: डेंगू से रिकवरी के दौरान इस गंभीर संक्रमण का खतरा, बरतें सावधानी वरना चली जाएगी आंखों की रोशनी

Thu, 18 Nov 2021 07:35 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेंगू रोगियों में ब्लैक फंगस का खतरा - फोटो : iStock
Medically Reviewed by-
डॉ श्रेय श्रीवास्तव
(इंटरनल मेडिसिन -सीनियर रेजिडेंट)
शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा


राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में पिछले कुछ महीनों से डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। मच्छरों के काटने के कारण होने वाली इस बीमारी को घातक माना जाता है। इस बीच दिल्ली में डेंगू से ठीक हो चुके एक मरीज में गंभीर संक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्टस के मुताबिक डेंगू से ठीक होने के 15 दिन बाद एक मरीज ने अचानक से आंख की रोशनी चले जाने की शिकायत की। जांच के दौरान डॉक्टरों ने व्यक्ति में ब्लैक फंगस संक्रमण की पहचान की है। इससे पहले ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस के मामले कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों में तेजी से बढ़ते हुए देखे गए थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या डेंगू से ठीक हो चुके लोगों में भी म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा हो सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अन्य संक्रमणों की ही तरह डेंगू के कारण भी लोगों को कई तरह की दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। संभव है लोगों को म्यूकोरमाइकोसिस की समस्या भी हो सकती है, इस बारे में विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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डेंगू का खतरा - फोटो : Pixabay
डेंगू से रिकवरी के बाद ब्लैक फंगस का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू संक्रमण के लक्षण हल्के से मध्यम तक हो सकते हैं। इसमें रोगियों को तेज बुखार, थकान, मांसपेशियों हड्डी और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, सिरदर्द, उल्टी-मतली जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने की समस्या को काफी गंभीर माना जाता है, ऐसे रोगियों को विशेष चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 की ही तरह डेंगू में भी प्रतिरक्षा प्रणाली का विशेष योगदान होता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, ऐसे लोगों में म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) होने या देर से रिकवरी होने की समस्या हो सकती है।
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ब्लैक फंगस का बढ़ता खतरा - फोटो : Pixabay
डेंगू के कारण कमजोर हो सकती है आपकी इम्यूनिटी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू बुखार एक वेक्टर जनित बीमारी है जो चार अलग-अलग वायरस के कारण होती है, यह मादा एडीज मच्छरों द्वारा फैलती है। जब भी शरीर डेंगू वायरस से संक्रमित होता है, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया वायरस से लड़ने के लिए मिलकर काम करती है। प्रतिरक्षा प्रणाली की बी-कोशिकाएं एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं जो उस फॉरेन पार्टिकल्स की पहचान करके उन्हें बेअसर करती हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में वायरस आपकी प्रतिरक्षा को कमजोर कर सकता है, जिससे आपके बीमार होने या अन्य फंगल संक्रमणों के शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है।

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ब्लैक फंगस का असर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में डॉ श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, डेंगू से रिकवरी के बाद म्यूकोरमाइकोसिस होना वैसे तो असामान्य स्थिति है। जो लोग पहले से ही कोमर्बिडिटी के शिकार हैं, अगर उन्हें डेंगू हो जाता है, ऐसे लोगों में रिकवरी के बाद म्यूकोरमाइकोसिस होने का खतरा हो सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। ब्लैक फंगस हमारे कान, नाक, आंख, मस्तिष्क के कुछ भाग को प्रभावित कर सकता है। डेंगू से रिकवरी के बाद यदि आंखों में लालिमा, धुंधला दिखाई देने, आंखों में दर्द या कुछ असामान्य लगे तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
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म्यूकोरमाइकोसिस से करें बचाव - फोटो : iStock
म्यूकोरमाइकोसिस से बचाव कैसे करें?
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के रोगियों में म्यूकोरमाइकोसिस का मामला अत्यंत दुर्लभ है। हालांकि सभी रोगियों को इलाज औऱ रिकवरी के कुछ दिनों बाद तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक म्यूकोरमाइकोसिस के खतरे से बचे रहने के लिए अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखें, किसी भी प्रकार के फंगस या बैक्टीरिया के संपर्क में आने से बचें। सबसे खास बात आहार में उन चीजों को शामिल करें जो इम्यूनिटी को बढ़ावा देती हैं। 


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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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